{"_id":"67ba15b3c84d0f48eb0f647b","slug":"dev-mahunag-dhanukhari-will-participate-in-mahashivratri-after-70-years-mandi-news-c-90-1-ssml1045-148610-2025-02-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: 70 साल बाद महाशिवरात्रि में भाग लेंगे देव माहूंनाग ढनुखरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: 70 साल बाद महाशिवरात्रि में भाग लेंगे देव माहूंनाग ढनुखरी
विज्ञापन
गोहर (मंडी)। छोटी काशी मंडी में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में नाचन के आराध्य श्रीदेव माहूंनाग मौवीसेरी ढनुखरी लगभग 70 वर्षों के अंतराल के बाद भाग लेंगे। देवता ने गूर के माध्यम से देववाणी कर इस वर्ष मंडी महाशिवरात्रि में भाग लेने की इच्छा जाहिर की है। देव आदेशानुसार श्रीदेव माहूंनाग 27 फरवरी को सुबह 9 बजे अपने भंडार से महाशिवरात्रि मेले के लिए पूरे लाव लश्कर के साथ अपने भाई आराध्य श्री देव बाला कामेश्वर भंगरोही के साथ प्रस्थान करेंगे।
देव माहूंनाग का मूल मंदिर ढनुखरी नामक स्थान में स्थित है और मूल भंडार मौवीसेरी पंचायत में स्थित है। देवता को विष के भंडारी के नाम से भी जाना जाता है जिनके मूल मुख के चरणामृत पीने मात्र से ही सांप का विष, कुत्ते का विष, पीलिया और काला पीलिया जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं। देवता की मान्यता मंडी, सुंदरनगर, बल्ह, नाचन, सराज के साथ-साथ कुल्लू जिले में भी हैं।
जनश्रुति है कि रियासतकाल में देवता का मंदिर सुकेत रियासत के तहत आता था। बाद में जब यह क्षेत्र मंडी रियासत के अधीन हो गया तब राजा ने इस मंदिर को भी शिफ्ट कर दिया था। आज भी इस स्थान पर प्राचीन मंदिर के अवशेष मौजूद है। यह भी कहा जाता है कि करसोग के मूल माहूंनाग के गूर ने देववाणी से लोगों को यह बताया था कि मौवीसेरी के ढनुखरी में भी मेरा ही स्वरूप है।
विज्ञापन
...
देवता ने गूर के माध्यम से देववाणी कर अब की बार महाशिवरात्रि में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की है। देवता के पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है। सर्व देवता सेवा समिति के माध्यम से उपायुक्त को फाइल भेजी है।
-दीपक शर्मा, पुजारी, देव माहूंनाग
विज्ञापन
देव माहूंनाग का मूल मंदिर ढनुखरी नामक स्थान में स्थित है और मूल भंडार मौवीसेरी पंचायत में स्थित है। देवता को विष के भंडारी के नाम से भी जाना जाता है जिनके मूल मुख के चरणामृत पीने मात्र से ही सांप का विष, कुत्ते का विष, पीलिया और काला पीलिया जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं। देवता की मान्यता मंडी, सुंदरनगर, बल्ह, नाचन, सराज के साथ-साथ कुल्लू जिले में भी हैं।
विज्ञापन
जनश्रुति है कि रियासतकाल में देवता का मंदिर सुकेत रियासत के तहत आता था। बाद में जब यह क्षेत्र मंडी रियासत के अधीन हो गया तब राजा ने इस मंदिर को भी शिफ्ट कर दिया था। आज भी इस स्थान पर प्राचीन मंदिर के अवशेष मौजूद है। यह भी कहा जाता है कि करसोग के मूल माहूंनाग के गूर ने देववाणी से लोगों को यह बताया था कि मौवीसेरी के ढनुखरी में भी मेरा ही स्वरूप है।
विज्ञापन
...
देवता ने गूर के माध्यम से देववाणी कर अब की बार महाशिवरात्रि में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की है। देवता के पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है। सर्व देवता सेवा समिति के माध्यम से उपायुक्त को फाइल भेजी है।
-दीपक शर्मा, पुजारी, देव माहूंनाग