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Mandi News: देव खुडीजल ने अग्निकुंड के चारों तरफ किया नृत्य
Sun, 01 Dec 2024 10:16 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 01 Dec 2024 10:16 PM IST
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देहुरी मंदिर में धूमधाम से मनाई गई बूढ़ी दिवाली
व्यास ऋषि, कोट पझारी के सम्मान में भी मनाया उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में इन दिनों देवताओं की परिक्रमा और देव कारज चल रहे हैं। ऐसे में जिला कुल्लू के अधिष्ठाता देवता खुडीजल की वास स्थली देहुरी में दो दिवसीय बूढ़ी दिवाली उत्सव मनाया गया।
दिवाली के लिए सजे देवता खुडीजल ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के बाहर निकले। मंदिर परिसर में जलाए गए अग्निकुंड के चारों ओर परिक्रमा कर देव नृत्य किया। रविवार को ढोल-नगाड़े, करनाल, नरसिंगों और शहनाई की स्वरलहरियों के साथ देवता ने सदियों से चल रही परंपरा का निर्वहन किया। देवता खुडीजल की मौजूदगी में मंदिर परिसर में घास (मूंजी) की बनी रस्सी को देवलुओं की ओर से तीन बार खींचा गया।
देवता के कारदार शेर सिंह, पूर्ण शर्मा और शिव राज भारद्वाज ने कहा कि बूढ़ी दिवाली की प्राचीन प्रथा के अनुसार देवता के 90 मुजारे से देवता खुडीजल की पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री को एकत्रित किया जाता है। इसमें जौ, गेहूं, मक्की और घी शामिल हैं। इस दौरान राजा बलि एवं बामन अवतार से संबंधित गीत भी गाए गए। देवता ने दो दिन तक मंदिर के बाहर सौह में देव नृत्य किया। चार गांवों और 90 मुजारे से आए देवलू भी झूम उठे। रघुपुरघाटी के साथ मंडी जिले के लोगों ने भी देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके अलावा देव व्यास ऋषि कुइंर, कोट पझारी और देवता सेरी नारायण के सम्मान में बूढ़ी दिवाली की धूम रही। यहां देव नृत्य के साथ महिलाओं और पुरुषों ने नाटी डाली। इस दौरान देवताओं के दर्शन के लिए दो दिन तक लोगों का तांता लगा रहा।
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व्यास ऋषि, कोट पझारी के सम्मान में भी मनाया उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में इन दिनों देवताओं की परिक्रमा और देव कारज चल रहे हैं। ऐसे में जिला कुल्लू के अधिष्ठाता देवता खुडीजल की वास स्थली देहुरी में दो दिवसीय बूढ़ी दिवाली उत्सव मनाया गया।
दिवाली के लिए सजे देवता खुडीजल ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के बाहर निकले। मंदिर परिसर में जलाए गए अग्निकुंड के चारों ओर परिक्रमा कर देव नृत्य किया। रविवार को ढोल-नगाड़े, करनाल, नरसिंगों और शहनाई की स्वरलहरियों के साथ देवता ने सदियों से चल रही परंपरा का निर्वहन किया। देवता खुडीजल की मौजूदगी में मंदिर परिसर में घास (मूंजी) की बनी रस्सी को देवलुओं की ओर से तीन बार खींचा गया।
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देवता के कारदार शेर सिंह, पूर्ण शर्मा और शिव राज भारद्वाज ने कहा कि बूढ़ी दिवाली की प्राचीन प्रथा के अनुसार देवता के 90 मुजारे से देवता खुडीजल की पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री को एकत्रित किया जाता है। इसमें जौ, गेहूं, मक्की और घी शामिल हैं। इस दौरान राजा बलि एवं बामन अवतार से संबंधित गीत भी गाए गए। देवता ने दो दिन तक मंदिर के बाहर सौह में देव नृत्य किया। चार गांवों और 90 मुजारे से आए देवलू भी झूम उठे। रघुपुरघाटी के साथ मंडी जिले के लोगों ने भी देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके अलावा देव व्यास ऋषि कुइंर, कोट पझारी और देवता सेरी नारायण के सम्मान में बूढ़ी दिवाली की धूम रही। यहां देव नृत्य के साथ महिलाओं और पुरुषों ने नाटी डाली। इस दौरान देवताओं के दर्शन के लिए दो दिन तक लोगों का तांता लगा रहा।
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