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जलेब में सबसे आगे चलते हैं देव छांजणू और छमांहू
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महाशिवरात्रि मेले में देव छांजणू और देव छमांहू। (फाइल फोटो)
- फोटो : Mandi
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले में शिरकत करने वाले देव छांजणू और छमांहू का अहम स्थान रहता है। दोनों देवता अपने मूल स्थान से 26 फरवरी को रवाना होंगे। इसी दिन दोनों देवताओं का धमेड़ के पास भव्य मिलन होगा। दोनों देवता एक मार्च को महाशिवरात्रि मेले में पहुंचेंगे।
देवता जलेब में सबसे आगे चलते हैं। ये प्राचीन समय से चली आ रही परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं। देवता 27 को हणोगी, 28 को नौमिल, एक मार्च को मंडी पहुंचेंगे। देव छमांहू का रात्रि ठहराव मट तो देव छांजणू का बाबा भूतनाथ मंदिर में रहता है।
पड्डल मैदान में दोनों ही देवता एक साथ बैठते हैं। छांजणू देवता बौंछड़ी, जबकि छमांहू देवता खणी में मूल स्थान है। देवता छमांहू शेषनाग का अवतार तो देव छांजणू माता हिडिंबा के बेटे घटोत्कच का प्रतिरूप माने जाते हैं। दोनों देवता राज देवता माधो राय की जलेब में सबसे आगे चलते हैं।
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मंडी रियासत के यही दो देवता हैं जिनकी मान्यता मंडी जनपद के साथ कुल्लू जनपद में भी है। देवता के कारदारों के अनुसार देव घटोत्कच गढ़पति देवता हैं। देव छांजणू को छांजणी झील में स्थापित किया गया है। दोनों देवताओं ने अगर कहीं जाना होता है तो एक साथ निकलते हैं। यहां तक कि मनाली में देवी हिडिंबा से मिलने जाने के लिए भी दोनों रथ एक साथ निकलते हैं। हिडिंबा देवी के यहां कोई भी कारज उनके पुत्र घटोत्कच के बिना संपन्न नहीं होता। देवता के भंडारी दिले राम ठाकुर ने बताया कि देवता एक मार्च को अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले में पहुंचेंगे। देवता का मंडी महाशिवरात्रि की जलेब के दौरान अहम स्थान रहता है। वह प्राचीन काल से सबसे आगे चलते हैं इस परंपरा का आज भी निवर्हन किया जा रहा है।
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देवता जलेब में सबसे आगे चलते हैं। ये प्राचीन समय से चली आ रही परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं। देवता 27 को हणोगी, 28 को नौमिल, एक मार्च को मंडी पहुंचेंगे। देव छमांहू का रात्रि ठहराव मट तो देव छांजणू का बाबा भूतनाथ मंदिर में रहता है।
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पड्डल मैदान में दोनों ही देवता एक साथ बैठते हैं। छांजणू देवता बौंछड़ी, जबकि छमांहू देवता खणी में मूल स्थान है। देवता छमांहू शेषनाग का अवतार तो देव छांजणू माता हिडिंबा के बेटे घटोत्कच का प्रतिरूप माने जाते हैं। दोनों देवता राज देवता माधो राय की जलेब में सबसे आगे चलते हैं।
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मंडी रियासत के यही दो देवता हैं जिनकी मान्यता मंडी जनपद के साथ कुल्लू जनपद में भी है। देवता के कारदारों के अनुसार देव घटोत्कच गढ़पति देवता हैं। देव छांजणू को छांजणी झील में स्थापित किया गया है। दोनों देवताओं ने अगर कहीं जाना होता है तो एक साथ निकलते हैं। यहां तक कि मनाली में देवी हिडिंबा से मिलने जाने के लिए भी दोनों रथ एक साथ निकलते हैं। हिडिंबा देवी के यहां कोई भी कारज उनके पुत्र घटोत्कच के बिना संपन्न नहीं होता। देवता के भंडारी दिले राम ठाकुर ने बताया कि देवता एक मार्च को अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले में पहुंचेंगे। देवता का मंडी महाशिवरात्रि की जलेब के दौरान अहम स्थान रहता है। वह प्राचीन काल से सबसे आगे चलते हैं इस परंपरा का आज भी निवर्हन किया जा रहा है।
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