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Mandi News: गणेश महोत्सव में पहली बार शिरकत करेंगे देव आदि ब्रह्मा
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मंडी। छोटी काशी में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व गणपति उत्सव का शुभारंभ उत्साह के साथ हुआ है। शहर के प्रसिद्ध मंदिरों, पंडालों और श्रद्धालुओं ने घरों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित की हैं।
25 सितंबर को इलाका उत्तरशाल से देव आदि ब्रह्मा पहली बाद उत्सव में शिकरत करेंगे, साथ ही माता जगजननी सहित अन्य देवी-देवताओं के रथ भी शोभायात्रा में शिरकत करेंगे। शहर के मंगवाई, विश्वकर्मा मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, जेल रोड, बंगलेश्वरी मंदिर भगवाहन, मोती बाजार और चौहटा बाजार में उत्सव का माहौल है।
गणपति उत्सव कमेटी विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी पंडित जय प्रकाश, नीलकंठ महादेव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष दीपक गुलेरिया, वाल्मीकि सभा के तरसेम चंद, लव-कुश धर्म सभा के प्रधान अनिल कुमार और बंगलेश्वरी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने बताया कि 25 सितंबर को गणेश प्रतिमाओं को राज देवता माधोराय तथा बाबा भूतनाथ के दर्शन के बाद शहर की परिक्रमा करवाई जाएगी। बाद में प्रतिमाओं को जल में प्रवाहित न करके सुरक्षित रखकर रोजाना पूजा-अर्चना की जाएगी।
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पंडित जय प्रकाश के अनुसार शास्त्रों में गणेश विसर्जन का कोई उल्लेख नहीं है। मान्यतानुसार गणेश जी 10 दिन तक बड़े भाई कार्तिक के पास ठहरने के बाद 11वें दिन समुद्र मार्ग से वैकुंठ लोक लौटे थे। महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को बड़े स्तर पर मनाया जाता है, उसी की देखादेखी हिमाचल में भी उत्सव मनाने की होड़ लगी है।
उधर, बंगलेश्वरी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने बताया कि देव आदि ब्रह्मा पहली बाद गणेश उत्सव में भाग लेंगे। अंतिम दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ भंडारे भी लगाए जाएंगे।
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25 सितंबर को इलाका उत्तरशाल से देव आदि ब्रह्मा पहली बाद उत्सव में शिकरत करेंगे, साथ ही माता जगजननी सहित अन्य देवी-देवताओं के रथ भी शोभायात्रा में शिरकत करेंगे। शहर के मंगवाई, विश्वकर्मा मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, जेल रोड, बंगलेश्वरी मंदिर भगवाहन, मोती बाजार और चौहटा बाजार में उत्सव का माहौल है।
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गणपति उत्सव कमेटी विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी पंडित जय प्रकाश, नीलकंठ महादेव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष दीपक गुलेरिया, वाल्मीकि सभा के तरसेम चंद, लव-कुश धर्म सभा के प्रधान अनिल कुमार और बंगलेश्वरी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने बताया कि 25 सितंबर को गणेश प्रतिमाओं को राज देवता माधोराय तथा बाबा भूतनाथ के दर्शन के बाद शहर की परिक्रमा करवाई जाएगी। बाद में प्रतिमाओं को जल में प्रवाहित न करके सुरक्षित रखकर रोजाना पूजा-अर्चना की जाएगी।
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पंडित जय प्रकाश के अनुसार शास्त्रों में गणेश विसर्जन का कोई उल्लेख नहीं है। मान्यतानुसार गणेश जी 10 दिन तक बड़े भाई कार्तिक के पास ठहरने के बाद 11वें दिन समुद्र मार्ग से वैकुंठ लोक लौटे थे। महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को बड़े स्तर पर मनाया जाता है, उसी की देखादेखी हिमाचल में भी उत्सव मनाने की होड़ लगी है।
उधर, बंगलेश्वरी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने बताया कि देव आदि ब्रह्मा पहली बाद गणेश उत्सव में भाग लेंगे। अंतिम दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ भंडारे भी लगाए जाएंगे।