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Mandi News: महंगाई से डिपो संचालक बेहाल, प्रदेश सरकार से ठोस फैसले की मांग
Thu, 18 Dec 2025 06:48 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 18 Dec 2025 06:48 AM IST
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मंडी। प्रदेश डिपो संचालक समिति के प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक आरके गौतम से शिमला में बैठक कर अपनी विभिन्न समस्याओं को रखा। बैठक में डिपो संचालकों को पेश आ रही आर्थिक और तकनीकी दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा हुई। संघ ने तर्क दिया कि वर्तमान व्यवस्था में डिपो संचालकों के लिए परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है इसलिए विभाग को इस दिशा में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है।
मंडी में समिति के प्रवक्ता संजीव वर्मा ने बताया कि बैठक में सिविल सप्लाई के माध्यम से सस्ती दरों पर ब्रांडेड खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाने का मुद्दा उठाया गया। इस पर निदेशक ने आश्वासन दिया कि भविष्य में डिपो में ब्रांडेड सामान उपलब्ध करवाया जाएगा।
बैठक में डिपो संचालकों के कमीशन का विषय भी प्रमुखता से रखा गया। समिति ने कहा कि वर्तमान में चार प्रतिशत कमीशन पर जीवनयापन करना बेहद कठिन हो गया है। महंगाई के इस दौर में डिपो संचालकों की स्थिति दिहाड़ीदार से भी कमजोर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि दुकान का किराया, बिजली, अन्य जरूरी व्यय निकालना संभव नहीं रह गया है। ऐसे में कमीशन या मानदेय में वृद्धि की मांग की गई।
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बैठक में समिति ने इंटरनेट सुविधा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। समिति प्रवक्ता संजीव वर्मा ने कहा कि डिपो होल्डर अपने निजी पैसे से इंटरनेट का खर्च उठा रहे हैं। कंपनी के साथ करार के अनुसार इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करवानी थी, लेकिन वर्ष 2016 से यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। हर डिपो संचालक को करीब 450 रुपये प्रतिमाह अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। संघ ने मांग की कि यह राशि कंपनी प्रबंधन से वसूल की जाए।
इस पर निदेशक आरके गौतम ने बताया कि यह मामला वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है और कोर्ट के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नई मशीनें मार्च 2026 से डिपो संचालकों को उपलब्ध करवाई जाएंगी जिनमें इंटरनेट सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी।
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मंडी में समिति के प्रवक्ता संजीव वर्मा ने बताया कि बैठक में सिविल सप्लाई के माध्यम से सस्ती दरों पर ब्रांडेड खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाने का मुद्दा उठाया गया। इस पर निदेशक ने आश्वासन दिया कि भविष्य में डिपो में ब्रांडेड सामान उपलब्ध करवाया जाएगा।
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बैठक में डिपो संचालकों के कमीशन का विषय भी प्रमुखता से रखा गया। समिति ने कहा कि वर्तमान में चार प्रतिशत कमीशन पर जीवनयापन करना बेहद कठिन हो गया है। महंगाई के इस दौर में डिपो संचालकों की स्थिति दिहाड़ीदार से भी कमजोर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि दुकान का किराया, बिजली, अन्य जरूरी व्यय निकालना संभव नहीं रह गया है। ऐसे में कमीशन या मानदेय में वृद्धि की मांग की गई।
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बैठक में समिति ने इंटरनेट सुविधा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। समिति प्रवक्ता संजीव वर्मा ने कहा कि डिपो होल्डर अपने निजी पैसे से इंटरनेट का खर्च उठा रहे हैं। कंपनी के साथ करार के अनुसार इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करवानी थी, लेकिन वर्ष 2016 से यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। हर डिपो संचालक को करीब 450 रुपये प्रतिमाह अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। संघ ने मांग की कि यह राशि कंपनी प्रबंधन से वसूल की जाए।
इस पर निदेशक आरके गौतम ने बताया कि यह मामला वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है और कोर्ट के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नई मशीनें मार्च 2026 से डिपो संचालकों को उपलब्ध करवाई जाएंगी जिनमें इंटरनेट सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी।