{"_id":"6207f0c44cda1218b528728b","slug":"decision-on-participation-in-shivratri-festival-of-dev-ganesh-bhatwadi-today-mandi-news-sml3994113117","type":"story","status":"publish","title_hn":"देव गणेश भटवाड़ी के शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने पर फैसला आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देव गणेश भटवाड़ी के शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने पर फैसला आज
विज्ञापन
ज्वालापुर के देवता गणेश (चंडैही) का रथ।
- फोटो : Mandi
मंडी। ज्वालापुर के प्रमुख देवता देव गणेश (चंडैही) 70 साल बाद शिवरात्रि मेले में शिरकत करेंगे या नहीं इस पर फैसला आज होगा। इसको लेकर देवताओं की कमेटी की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले राजदरबार में देवता के पक्ष में महोत्सव में भाग लेने का फैसला हुआ था।
देवता का किसी अन्य देवता के साथ जलेब में चलने को लेकर विवाद था। इस कारण देव रथ काफी समय से मेले में शिरकत नहीं कर रहा है। देवता के स्थान पर आज भी नारियल रखा जाता है। जाग में देव गुर परंपरा को निभाते आए हैं। देवता का मंदिर मंडी से 80 किमी दूर ज्वालापुर के आढ़ीधार में है। अगर बैठक में सहमति बनती है तो देवता 600 कारदारों के साथ मंडी शिवरात्रि महोत्सव को शिरकत करेंगे। देव के दो रूपों में रथ तैयार है। शिवरात्रि मेले के दौरान राजबेहड़े में पराशर देव के साथ देवता का रहता है। जलेब और जाग में भी देव गणेश का अहम स्थान माना जाता है। दो दिन पैदल सफर कर देवता मंडी में पहुंचते हैं। बीच में रात्रि ठहराव रहता है।
देवता का मंदिर पकौड़ा शैली से बना है। आजकल देवता की नई कोठी का काम जोरों पर जारी है। भटवाड़ गांव में 150 परिवार पंडितों का है। देवता के खानदानी गुर कर्म सिंह ने बताया कि बैठक में बात बनती है तो इस बार देव रथ के साथ मेले में आने का फैसला लिया है, अगर प्रशासन देव रथ को जलेब में चलने समेत पहले की भांति स्थान देता है तो देवता अपने 600 हारूओं के साथ मेले में शिरकत करेंगे।
विज्ञापन
देव गणेश (चंडौही) भटवाड़ी के पंडित जय किशन ने बताया कि देवता रियासतकाल में शिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करते थे, लेकिन किसी कारणवश कई वर्षों से देवता का शिवरात्रि मेला में आना नहीं हुआ। शिवरात्रि में आने को लेकर अभी क्षेत्र की कमेटियों के साथ बैठकर निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
देवता का किसी अन्य देवता के साथ जलेब में चलने को लेकर विवाद था। इस कारण देव रथ काफी समय से मेले में शिरकत नहीं कर रहा है। देवता के स्थान पर आज भी नारियल रखा जाता है। जाग में देव गुर परंपरा को निभाते आए हैं। देवता का मंदिर मंडी से 80 किमी दूर ज्वालापुर के आढ़ीधार में है। अगर बैठक में सहमति बनती है तो देवता 600 कारदारों के साथ मंडी शिवरात्रि महोत्सव को शिरकत करेंगे। देव के दो रूपों में रथ तैयार है। शिवरात्रि मेले के दौरान राजबेहड़े में पराशर देव के साथ देवता का रहता है। जलेब और जाग में भी देव गणेश का अहम स्थान माना जाता है। दो दिन पैदल सफर कर देवता मंडी में पहुंचते हैं। बीच में रात्रि ठहराव रहता है।
विज्ञापन
देवता का मंदिर पकौड़ा शैली से बना है। आजकल देवता की नई कोठी का काम जोरों पर जारी है। भटवाड़ गांव में 150 परिवार पंडितों का है। देवता के खानदानी गुर कर्म सिंह ने बताया कि बैठक में बात बनती है तो इस बार देव रथ के साथ मेले में आने का फैसला लिया है, अगर प्रशासन देव रथ को जलेब में चलने समेत पहले की भांति स्थान देता है तो देवता अपने 600 हारूओं के साथ मेले में शिरकत करेंगे।
विज्ञापन
देव गणेश (चंडौही) भटवाड़ी के पंडित जय किशन ने बताया कि देवता रियासतकाल में शिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करते थे, लेकिन किसी कारणवश कई वर्षों से देवता का शिवरात्रि मेला में आना नहीं हुआ। शिवरात्रि में आने को लेकर अभी क्षेत्र की कमेटियों के साथ बैठकर निर्णय लिया जाएगा।