{"_id":"69de1117857d3f3ab100f699","slug":"daughters-tasted-piddi-at-their-mothers-home-mandi-news-c-88-1-ssml1007-180382-2026-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: बेटियों ने मायके में चखा पिदड़ी का स्वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: बेटियों ने मायके में चखा पिदड़ी का स्वाद
विज्ञापन
चंबा में धूमधाम से मनाया वैशाखी पर्व
सूही मेले के बाद मनाया जाता है बसोआ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सूही माता मेले के समापन के बाद हर साल बसोआ यानी वैशाखी पर्व मनाया जात है। तीन दिन तक चलने वाला सूही मेला बच्चों और महिलाओं के लिए खास होता है। इस दौरान रानी सुनैयना के बलिदान को चंबा के लोग याद करते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल को वैशाखी पर्व मनाया जाता है। इसके लिए मायका पक्ष से विवाहित बेटियों को निमंत्रण भेजा जाता है। इसके बाद बेटियां अपने मायके आती हैं और त्योहार का प्रमुख व्यंजन पिंदड़ी का स्वाद चखती हैं। बेटी के मायके आने पर परिजन कई प्रकार के व्यंजन बनाते हैं और बेटियों को परोसते हैं। इनमें खास व्यंजन पिंदड़ी रहता है। पिंदड़ी बनाने के लिए गेहूं और कोदरा के आटे को हल्की आंच पर पकाने के बाद छाछ से गूंथा जाता है। इसके बाद छोटी-छोटी गोल पिन्नियां बनाई जाती हैं। इसके बाद हरे पत्तों में रखकर टोकरी में रखा जाता है। अगले दिन इसे परोसा जाता है।
विज्ञापन
सूही मेले के बाद मनाया जाता है बसोआ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सूही माता मेले के समापन के बाद हर साल बसोआ यानी वैशाखी पर्व मनाया जात है। तीन दिन तक चलने वाला सूही मेला बच्चों और महिलाओं के लिए खास होता है। इस दौरान रानी सुनैयना के बलिदान को चंबा के लोग याद करते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल को वैशाखी पर्व मनाया जाता है। इसके लिए मायका पक्ष से विवाहित बेटियों को निमंत्रण भेजा जाता है। इसके बाद बेटियां अपने मायके आती हैं और त्योहार का प्रमुख व्यंजन पिंदड़ी का स्वाद चखती हैं। बेटी के मायके आने पर परिजन कई प्रकार के व्यंजन बनाते हैं और बेटियों को परोसते हैं। इनमें खास व्यंजन पिंदड़ी रहता है। पिंदड़ी बनाने के लिए गेहूं और कोदरा के आटे को हल्की आंच पर पकाने के बाद छाछ से गूंथा जाता है। इसके बाद छोटी-छोटी गोल पिन्नियां बनाई जाती हैं। इसके बाद हरे पत्तों में रखकर टोकरी में रखा जाता है। अगले दिन इसे परोसा जाता है।