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Mandi News: फसल बीमा पोर्टल 4 दिन से ठप, किसानों-बागवानों की बढ़ीं मुश्किलें
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भारी बारिश में सता रहा किसानों को नुकसान का डर
मक्की और धान के लिए 15 जुलाई से शुरू हुई थी बीमा की प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मौसम के बदलते मिजाज और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की बीमा प्रक्रिया 15 जुलाई से शुरू की थी लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वेबसाइट पिछले चार दिनों से ठप होने के कारण हजारों किसान अपनी फसलों का बीमा नहीं करवा पा रहे हैं।
वेबसाइट बंद होने से किसान लोकमित्र केंद्रों और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन आवेदन जमा नहीं हो पा रहे। किसानों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण यदि फसल का नुकसान हो गया तो वे बीमा के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे।
बल्ह घाटी के किसान राज कुमार, पवन कुमार, सुरेश कुमार, जितेंद्र, हेमराज, चमन लाल और किशन चंद ने मांग की है कि वेबसाइट की तकनीकी खराबी जल्द दूर की जाए, ताकि कोई भी किसान आर्थिक सुरक्षा से वंचित न रहे।
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मक्की और धान की फसल के लिए 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बीमित राशि तय की गई है। किसानों को केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम यानी 1,200 रुपये प्रति हेक्टेयर या 98 रुपये प्रति बीघा देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है।
उपनिदेशक, कृषि विभाग मंडी डॉ. रामचंद्र चौधरी ने बताया कि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से बीमा प्रक्रिया जारी है। पोर्टल बंद होने से किसानों को आ रही समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।
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मक्की और धान के लिए 15 जुलाई से शुरू हुई थी बीमा की प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मौसम के बदलते मिजाज और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की बीमा प्रक्रिया 15 जुलाई से शुरू की थी लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वेबसाइट पिछले चार दिनों से ठप होने के कारण हजारों किसान अपनी फसलों का बीमा नहीं करवा पा रहे हैं।
वेबसाइट बंद होने से किसान लोकमित्र केंद्रों और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन आवेदन जमा नहीं हो पा रहे। किसानों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण यदि फसल का नुकसान हो गया तो वे बीमा के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे।
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बल्ह घाटी के किसान राज कुमार, पवन कुमार, सुरेश कुमार, जितेंद्र, हेमराज, चमन लाल और किशन चंद ने मांग की है कि वेबसाइट की तकनीकी खराबी जल्द दूर की जाए, ताकि कोई भी किसान आर्थिक सुरक्षा से वंचित न रहे।
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मक्की और धान की फसल के लिए 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बीमित राशि तय की गई है। किसानों को केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम यानी 1,200 रुपये प्रति हेक्टेयर या 98 रुपये प्रति बीघा देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है।
उपनिदेशक, कृषि विभाग मंडी डॉ. रामचंद्र चौधरी ने बताया कि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से बीमा प्रक्रिया जारी है। पोर्टल बंद होने से किसानों को आ रही समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।