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Mandi News: जिले में 5वीं और 8वीं के शत-प्रतिशत परिणाम पर गहराया विवाद
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बिना ठोस नीति के परीक्षा परिणामों पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं : संघ
विभाग के रवैये को बताया शिक्षकों के परिश्रम का अपमान, निदेशालय स्तर पर मूल्यांकन की दी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। मंडी जिले में कक्षा 5वीं और 8वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहने पर शिक्षा विभाग की ओर से जताए गए असंतोष को लेकर विवाद गहरा गया है। हिमाचल प्रदेश राजकीय भाषाई अध्यापक संघ ने विभाग के इस रुख का कड़ा विरोध करते हुए इसे शिक्षकों के परिश्रम और समर्पण का अपमान बताया है। संघ के राज्य अध्यक्ष हेमराज ठाकुर और महासचिव अर्जुन सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों ने कड़ी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की है, जिसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि जब परीक्षा परिणाम कम रहता है तो शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा जाता है, लेकिन शत-प्रतिशत परिणाम आने पर भी संशय जताना विभाग की दोहरी नीति को दर्शाता है।
संघ ने विभाग को चुनौती देते हुए कहा कि यदि शिक्षकों पर विश्वास नहीं है तो उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सीधे निदेशालय स्तर पर कराया जाए। यदि किसी प्रकार की कोताही पाई जाती है तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि रिटेंशन पॉलिसी के तहत विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण करना ही विभाग की मंशा है, तो इसके लिए स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। बिना ठोस नीति के परीक्षा परिणामों पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि इस नकारात्मक दृष्टिकोण को तुरंत वापस लिया जाए और शिक्षकों को बिना मानसिक दबाव के कार्य करने का अवसर दिया जाए।
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विभाग के रवैये को बताया शिक्षकों के परिश्रम का अपमान, निदेशालय स्तर पर मूल्यांकन की दी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। मंडी जिले में कक्षा 5वीं और 8वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहने पर शिक्षा विभाग की ओर से जताए गए असंतोष को लेकर विवाद गहरा गया है। हिमाचल प्रदेश राजकीय भाषाई अध्यापक संघ ने विभाग के इस रुख का कड़ा विरोध करते हुए इसे शिक्षकों के परिश्रम और समर्पण का अपमान बताया है। संघ के राज्य अध्यक्ष हेमराज ठाकुर और महासचिव अर्जुन सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों ने कड़ी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की है, जिसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि जब परीक्षा परिणाम कम रहता है तो शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा जाता है, लेकिन शत-प्रतिशत परिणाम आने पर भी संशय जताना विभाग की दोहरी नीति को दर्शाता है।
संघ ने विभाग को चुनौती देते हुए कहा कि यदि शिक्षकों पर विश्वास नहीं है तो उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सीधे निदेशालय स्तर पर कराया जाए। यदि किसी प्रकार की कोताही पाई जाती है तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि रिटेंशन पॉलिसी के तहत विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण करना ही विभाग की मंशा है, तो इसके लिए स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। बिना ठोस नीति के परीक्षा परिणामों पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि इस नकारात्मक दृष्टिकोण को तुरंत वापस लिया जाए और शिक्षकों को बिना मानसिक दबाव के कार्य करने का अवसर दिया जाए।
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