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Mandi News: डूबती फसल को सहारा दे गए मेघ
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थुनाग (मंडी)। सूखे जैसे हालातों के कारण प्रभावित हो रही फसलों को मेघ सहारा दे गए हैं। तीन दिन बारिश-बर्फबारी होने से खेतों-बगीचों में पर्याप्त नमी है। जिले में 15 फीसदी क्षेत्र में गेहूं की रुकी बिजाई अब शुरू हो गई है। बिजी गई गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी थी, उसे संजीवनी मिली है। अब किसानों ने खेतों और बगीचों कर रुख कर लिया है। मटर की बुवाई के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि कुछेक क्षेत्र में नगदी फसलें मटर, फूलगोभी, मूली आदि की बिजाई कर दी है।
बागवान भी सेब पौधों की प्रूनिंग और नए पौधे लगाने की तैयारी में जुट गए हैं। दिसंबर की बर्फबारी बागबानी के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इससे सेब पौधे रोगों से बचे रहते हैं। पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट भी खत्म हो जाते हैं। साथ ही चिलिंग आवर्स भी पूरे होने की संभावना ज्यादा हो जाती है। इससे उत्पादन भी बेहतर रहता है।
बर्फबारी और बारिश के बीच बगीचों में तौलिए बनाकर खाद-गोबर का मिश्रण डालना फसल के लिए उपयुक्त रहता है। बर्फबारी से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे गर्मियों में सिंचाई की जरूरत कम होती है। औद्यानिकी एवं वानिकी कॉलेज थुनाग में फल वैज्ञानिक डॉ. मनीष ठाकुर ने कहा कि बर्फबारी संजीवनी बनी है। बारिश भी टॉनिक का काम करेगी। उन्होंने बागवानों को बर्फबारी के बाद बगीचों के काम निपटाने की सलाह दी है।
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गाड़ागुशैण की सभी सड़कें बंद
बारिश-बर्फबारी से सराज से गाड़ागुशैण का संपर्क कट गया है। क्षेत्र की चार पंचायतों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली जीभी-गाड़ागुशैण सड़क बर्फबारी से बंद पड़ी है। गाड़ागुशैण से छतरी, करसोग, जंजैहली और शैटाधार सड़कें भी पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। रविवार को गाड़ागुशैण क्षेत्र में 30 से 40 सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई। इससे पहले क्षेत्र में 50 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी। क्षेत्र के लगभग दर्जन गांवों में बिजली गुल हो गई थी जिसे बहाल कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग जंजैहली के अधिशासी अभियंता रोशन लाल ने बताया कि सड़क से बर्फ हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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बागवान भी सेब पौधों की प्रूनिंग और नए पौधे लगाने की तैयारी में जुट गए हैं। दिसंबर की बर्फबारी बागबानी के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इससे सेब पौधे रोगों से बचे रहते हैं। पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट भी खत्म हो जाते हैं। साथ ही चिलिंग आवर्स भी पूरे होने की संभावना ज्यादा हो जाती है। इससे उत्पादन भी बेहतर रहता है।
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बर्फबारी और बारिश के बीच बगीचों में तौलिए बनाकर खाद-गोबर का मिश्रण डालना फसल के लिए उपयुक्त रहता है। बर्फबारी से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे गर्मियों में सिंचाई की जरूरत कम होती है। औद्यानिकी एवं वानिकी कॉलेज थुनाग में फल वैज्ञानिक डॉ. मनीष ठाकुर ने कहा कि बर्फबारी संजीवनी बनी है। बारिश भी टॉनिक का काम करेगी। उन्होंने बागवानों को बर्फबारी के बाद बगीचों के काम निपटाने की सलाह दी है।
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गाड़ागुशैण की सभी सड़कें बंद
बारिश-बर्फबारी से सराज से गाड़ागुशैण का संपर्क कट गया है। क्षेत्र की चार पंचायतों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली जीभी-गाड़ागुशैण सड़क बर्फबारी से बंद पड़ी है। गाड़ागुशैण से छतरी, करसोग, जंजैहली और शैटाधार सड़कें भी पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। रविवार को गाड़ागुशैण क्षेत्र में 30 से 40 सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई। इससे पहले क्षेत्र में 50 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी। क्षेत्र के लगभग दर्जन गांवों में बिजली गुल हो गई थी जिसे बहाल कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग जंजैहली के अधिशासी अभियंता रोशन लाल ने बताया कि सड़क से बर्फ हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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