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Mandi News: सराज में बच्चों ने नाका लगाकर मांगी मिठाई
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थुनाग बाजार में चिड़िया लेकर खिचड़ी मांगते बच्चे। संवाद
थुनाग (मंडी)। सराज में ऋतु परिवर्तन का द्योतक मकर संक्रांति पर्व में घर-घर खिचड़ी बनाई गई। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। जंजैहली, थुनाग, लंबाथाच, बगस्याड़ और बागाचनोगी में बच्चों ने सुबह से ही चिड़िया की पालकी लेकर बाजारों का रुख किया। दुकानदारों और राहगीरों को बधाई देकर मिठाई मांगी। कांढ़ा से लेकर जंजैहली तक लगभग दस जगह पर बच्चों ने चिड़िया की पालकी को लेकर सड़क पर नाका लगा रखा था। नाच गाकर वाहन चालकों से मिठाई वसूल रहे थे।
वाहन चालक भी न नुकर के बाद बच्चों को खुशी-खुशी दस से बीस रुपये बतौर मिठाई दे रहे थे। सराज में मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन से शुष्क ठंड से निजात मिलती है और तापमान बढ़ने लगता है। सूर्य भी इस दिन लंबी छलांग लगाता है अर्थात दिन बढ़ने लगते हैं। पंडित केशव राम ने बताया कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा भगवान सूर्य और शनिदेव की कथा से भी जुड़ी हुई है। इसके पीछे और भी कई धार्मिक पौराणिक मान्यताएं हैं।
खिचड़ी संतुलित और पौष्टिक आहार है। सर्दियों में यह शरीर को गर्म और ऊर्जा प्रदान करती है। इसके साथ तिल-गुड़ का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन तिल, चावल, दाल और खिचड़ी दान करने का विशेष महत्व है। इसे धार्मिक कार्य और पुण्य प्राप्ति का प्रतीक माना गया है। संवाद
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वाहन चालक भी न नुकर के बाद बच्चों को खुशी-खुशी दस से बीस रुपये बतौर मिठाई दे रहे थे। सराज में मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन से शुष्क ठंड से निजात मिलती है और तापमान बढ़ने लगता है। सूर्य भी इस दिन लंबी छलांग लगाता है अर्थात दिन बढ़ने लगते हैं। पंडित केशव राम ने बताया कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा भगवान सूर्य और शनिदेव की कथा से भी जुड़ी हुई है। इसके पीछे और भी कई धार्मिक पौराणिक मान्यताएं हैं।
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खिचड़ी संतुलित और पौष्टिक आहार है। सर्दियों में यह शरीर को गर्म और ऊर्जा प्रदान करती है। इसके साथ तिल-गुड़ का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन तिल, चावल, दाल और खिचड़ी दान करने का विशेष महत्व है। इसे धार्मिक कार्य और पुण्य प्राप्ति का प्रतीक माना गया है। संवाद
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