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फल-सब्जियों की प्लास्टिक पैकिंग की बॉर्डर पर करें जांच : दीनानाथ
Sun, 25 Jan 2026 11:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:39 PM IST
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में प्लास्टिक पर लगे पूर्ण प्रतिबंध के बीच बाहरी राज्यों से आने वाली फल-सब्जियों की पैकिंग स्थानीय आढ़तियों के लिए गले की फांस बन गई है। कांगणी सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान एवं प्रदेश चेयरमैन दीनानाथ सैणी ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि प्लास्टिक पैकिंग के चालान आढ़तियों के करने के बजाय प्रदेश की सीमाओं पर ही जांच सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाहरी राज्यों से आने वाले माल की वहीं सख्ती से जांच होगी, तो थोक विक्रेता खुद-ब-खुद वैकल्पिक पैकिंग का इस्तेमाल शुरू कर देंगे। दीनानाथ सैणी ने कहा कि हिमाचल में आने वाली 90 प्रतिशत फल-सब्जियां पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आती हैं, जहां प्लास्टिक पैकिंग पर रोक नहीं है। जब यह माल प्रदेश की मंडियों में पहुंचता है तो स्थानीय दुकानदारों के भारी-भरकम चालान काट दिए जाते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि आढ़ती उस पैकिंग के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, जो दूसरे राज्यों से होकर आ रही है। लगातार हो रहे इन चालानों से व्यापारियों में भारी रोष है और अब दुकानें बंद करने तक की नौबत आ गई है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि आढ़ती अपने स्तर पर इस माल की री-पैकिंग कागज या लकड़ी के बक्सों में करते हैं तो लागत में काफी वृद्धि होगी।
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इस अतिरिक्त खर्च का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और फल-सब्जियों के दाम आसमान छूने लगेंगे। ऐसे में व्यापारियों ने सरकार से आग्रह किया है कि व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए नियमों में बदलाव किया जाए और मुख्य रूप से प्रवेश द्वारों पर ही निगरानी बढ़ाई जाए।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाहरी राज्यों से आने वाले माल की वहीं सख्ती से जांच होगी, तो थोक विक्रेता खुद-ब-खुद वैकल्पिक पैकिंग का इस्तेमाल शुरू कर देंगे। दीनानाथ सैणी ने कहा कि हिमाचल में आने वाली 90 प्रतिशत फल-सब्जियां पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आती हैं, जहां प्लास्टिक पैकिंग पर रोक नहीं है। जब यह माल प्रदेश की मंडियों में पहुंचता है तो स्थानीय दुकानदारों के भारी-भरकम चालान काट दिए जाते हैं।
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उन्होंने तर्क दिया कि आढ़ती उस पैकिंग के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, जो दूसरे राज्यों से होकर आ रही है। लगातार हो रहे इन चालानों से व्यापारियों में भारी रोष है और अब दुकानें बंद करने तक की नौबत आ गई है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि आढ़ती अपने स्तर पर इस माल की री-पैकिंग कागज या लकड़ी के बक्सों में करते हैं तो लागत में काफी वृद्धि होगी।
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इस अतिरिक्त खर्च का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और फल-सब्जियों के दाम आसमान छूने लगेंगे। ऐसे में व्यापारियों ने सरकार से आग्रह किया है कि व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए नियमों में बदलाव किया जाए और मुख्य रूप से प्रवेश द्वारों पर ही निगरानी बढ़ाई जाए।