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चंबा के लाल चावल, राजमाह बने पसंद
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जोगिंद्रनगर मेले में चंबा जिला के तीसा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से सजाया स्टाल।
- फोटो : Mandi
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। राज्यस्तरीय जोगिंद्रनगर मेले में स्वयं सहायता समूह की ओर से बनाए गए घरेलू उत्पादों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। पहली बार चंबा से जोगिंद्रनगर पहुंची ईशा स्वयं सहायता समूह खंड तीसा की महिलाओं की ओर से निर्मित सफेद शहद और अखरोट गिरी 1000 रुपये प्रति किलो तक बिकी।
चंबा के पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी सजाए बैठी स्वयं सहायता समूह की महिला ममता ने बताया कि सफेद शहद शुगर के मरीज भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। अखरोट गिरी को प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के बड़े महोत्सवों में भी बिक्री के लिए रखा जा रहा है।
ओडीसा, विशाखापट्टनम और मुंबई तक चंबा के पारंपरिक व्यंजन ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं। प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय मेलों में लाखों रुपये की आमदनी तीसा स्वयं सहायता समूह को हुई है। मेले में चंबा चुख भी 330 रुपये प्रति लीटर बिक रही है।
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लाल चावल 200 रुपये प्रति किलो वहीं राजमाह ढाई सौ और साबुत माह 280 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। रामलीला मैदान में सजे सरस मेले में जिलेभर के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से तैयार घरेलू उत्पाद के अलावा घरों की साज-सजावट का सामान भी रखा गया है। संवाद
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चंबा के पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी सजाए बैठी स्वयं सहायता समूह की महिला ममता ने बताया कि सफेद शहद शुगर के मरीज भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। अखरोट गिरी को प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के बड़े महोत्सवों में भी बिक्री के लिए रखा जा रहा है।
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ओडीसा, विशाखापट्टनम और मुंबई तक चंबा के पारंपरिक व्यंजन ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं। प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय मेलों में लाखों रुपये की आमदनी तीसा स्वयं सहायता समूह को हुई है। मेले में चंबा चुख भी 330 रुपये प्रति लीटर बिक रही है।
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लाल चावल 200 रुपये प्रति किलो वहीं राजमाह ढाई सौ और साबुत माह 280 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। रामलीला मैदान में सजे सरस मेले में जिलेभर के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से तैयार घरेलू उत्पाद के अलावा घरों की साज-सजावट का सामान भी रखा गया है। संवाद