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Mandi News: बड़ा देव कमरूनाग कमरूघाटी से महाशिवरात्रि के लिए रवाना

Sat, 07 Feb 2026 06:43 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Sat, 07 Feb 2026 06:43 AM IST
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Big God Kamrunag leaves for Mahashivratri from Kamrughati
गोत गांव से महाशिवरात्रि के लिए देवलुओं के साथ रवाना होते बड़ा देव कमरूनाग। -स्रोत : विभाग
गोहर (मंडी)। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव-2026 की धार्मिक औपचारिकताओं का आगाज हो गया है। मंडी जनपद के आराध्य और वर्षा के देवता बड़ा देव कमरूनाग ने शुक्रवार को कमरूघाटी के गोत गांव स्थित अपने भंडार से छोटी काशी मंडी के लिए प्रस्थान किया।
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देव वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनि और जय घोष के बीच जब देवता का सूरज पख्खा धंग्यारा गलू स्थित परता स्थल पर पहुंचा तो समूची घाटी भक्ति के रंग में सराबोर हो गई। यहां कुछ समय विश्राम के दौरान स्थानीय लोगों ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। देवता के मंडी प्रस्थान के साथ ही क्षेत्र में उत्सव और श्रद्धा का माहौल बन गया है।
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चार काहुली, रियासतकालीन नगाड़ा, ढोल और धांस बजाते बजंतरी मंगलध्वनी करते आगे बढ़े। बड़ादेव के दल में पुजारी बोधराज ठाकुर, कटवाल चेत राम ठाकुर, पूर्व गूर समेत 28 देवलू साथ रवाना हुए। पुलिस कर्मी और राजस्व विभाग के कर्मचारी भी साथ चल रहे हैं। इस वर्ष की यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। देव परंपराओं का निर्वहन गूर के स्थान पर पुजारी बोधराज ठाकुर करेंगे।
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पुजारी बोधराज ठाकुर ने बताया कि 135 किलोमीटर की इस नौ दिवसीय पैदल यात्रा के दौरान देवता विभिन्न क्षेत्रों में भक्तों को दर्शन देते हुए 13 फरवरी को गुटकर पहुंचेंगे। 14 फरवरी को मंडी के प्रवेश द्वार पुलघराट पर प्रशासन और सर्व देवता कमेटी द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। बड़ा देव के मंडी पहुंचते ही महोत्सव के कारज (कार्य) विधिवत रूप से आरंभ माने जाते हैं।
मंडी पहुंचने पर बड़ा देव कमरूनाग का राज देवता माधोराय के साथ ऐतिहासिक मिलन होगा, जहां उपायुक्त एवं मेला कमेटी के अध्यक्ष उनका स्वागत करेंगे। इसके उपरांत देवता टारना स्थित माता श्यामा काली मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां वे पूरे महोत्सव के दौरान विराजमान रहकर भक्तों को दर्शन देंगे।
लंबा सफर तय कर पहुंचेंगे देव चपलांदू नाग और मगरू महादेव
मंडी महाशिवरात्रि केवल एक मेला नहीं, बल्कि शैव, वैष्णव और लोक देवताओं का अद्भुत संगम है। देव चपलांदू नाग छतरी से करीब 135 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर सबसे दूर से आने वाले देवता हैं। इन्हें शेषनाग के प्रतिरूप में पूजा जाता है। बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा अपनी मूल कोठी से 125 किलोमीटर का सफर तय कर सैकड़ों देवलुओं के साथ छोटी काशी पहुंचेंगे। वहीं, मगरू महादेव छतरी क्षेत्र से ही करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय कर महादेव भी इस महाकुंभ का हिस्सा बनेंगे।


16 फरवरी को प्रस्थान करेंगी माता कोयला
बड़ा देव कमरूनाग की बहन मानी जाने वाली माता कोयला 16 फरवरी को बल्ह घाटी के राजगढ़ से मंडी के लिए रवाना होंगी। माता काली का रूप मानी जाने वाली देवी कोयला के प्रति बल्ह घाटी में गहरी आस्था है। मान्यता है कि कोयला माता ने प्राचीन काल में महामारी को शांत किया था। देवी कोयला के पुजारी मोहन लाल का कहना है 22 फरवरी तक माता महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होकर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक मंडी पड्डल मैदान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगी। रात्रि प्रवास भक्तों के घर पर करेंगी।
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