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Mandi News: नोटिस के बाद बल्ह घाटी में 63,679 मीट्रिक टन रेत और बजरी की नीलामी पर रोक
Thu, 18 Jul 2024 01:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 18 Jul 2024 01:02 AM IST
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बल्ह घाटी में अवैध रूप से लगे हुए रेत बजरी के ढेर। जिन्हें विभाग ने अपने कब्जे में लिया है। स
नेरचौक (मंडी)। खनन विभाग की ओर से बल्ह क्षेत्र में 15 स्थान में करीब 63,679 मीट्रिक टन रेत और बजरी कब्जे में ली है। करीब 12,720 टिपर रेत और बजरी अवैध तरीके से खनन माफिया ने निकाली है। इसकी नीलामी 11 जुलाई को तय थी, लेकिन सुंदरनगर के एक अधिवक्ता के नोटिस के बाद खनन विभाग ने प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
अधिवक्ता दीपक अटवाल का कहना है कि अवैध खनिज का सरकारी जुर्माना 500 रुपये प्रति हजार मीट्रिक टन लगाया जाता है। इस हिसाब से इस अवैध खनिज का जुर्माना या कीमत करीब 31.79 लाख रुपये बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग हर वर्ष चुपचाप इसकी नीलामी करवा देता है। इससे सरकार को भारी चूना लग रहा है।
उन्होंने कहा कि खनन सामग्री की खोदाई और ढेर लगाने की ऐसी अवैध गतिविधियों से क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। विभाग ने न तो खनन करने वाले लोगों को पकड़ा और न उन्हें कोई जुर्माना लगाया है। इस पर कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की गई है। बल्ह क्षेत्र में कई भागों स्टॉक लगाकर बरसात के दिनों में उसे कई गुना अधिक रेट पर बेचा जाता है।
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उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से इन अवैध ढेरों को कब्जे में लेकर औने-पौने दामों पर नीलाम कर दिया जाता है। यह किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। नदियों और खड्डों की सुरक्षा राष्ट्रीय हरित अधिकरण और उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी आदेशों और निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन विभाग इसकी अनदेखी कर रहा है।
उधर, जिला खनन अधिकारी बिंदिया का कहना है कि विभाग अवैध खनन पर कार्रवाई कर रहा है। बल्ह के विभिन्न क्षेत्रों में 15 स्थानों पर अवैध रूप से एकत्र कर रखे रेत और बजरी के ढेरों को अपने कब्जे में लिया है। इनको नीलम करने की प्रक्रिया 11 जुलाई को होनी थी, लेकिन कानूनी नोटिस आने पर नीलामी प्रक्रिया रोकी गई है। अब कानूनी नोटिस का जवाब देने के बाद नीलामी करवाई जाएगी।
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अधिवक्ता दीपक अटवाल का कहना है कि अवैध खनिज का सरकारी जुर्माना 500 रुपये प्रति हजार मीट्रिक टन लगाया जाता है। इस हिसाब से इस अवैध खनिज का जुर्माना या कीमत करीब 31.79 लाख रुपये बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग हर वर्ष चुपचाप इसकी नीलामी करवा देता है। इससे सरकार को भारी चूना लग रहा है।
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उन्होंने कहा कि खनन सामग्री की खोदाई और ढेर लगाने की ऐसी अवैध गतिविधियों से क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। विभाग ने न तो खनन करने वाले लोगों को पकड़ा और न उन्हें कोई जुर्माना लगाया है। इस पर कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की गई है। बल्ह क्षेत्र में कई भागों स्टॉक लगाकर बरसात के दिनों में उसे कई गुना अधिक रेट पर बेचा जाता है।
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उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से इन अवैध ढेरों को कब्जे में लेकर औने-पौने दामों पर नीलाम कर दिया जाता है। यह किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। नदियों और खड्डों की सुरक्षा राष्ट्रीय हरित अधिकरण और उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी आदेशों और निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन विभाग इसकी अनदेखी कर रहा है।
उधर, जिला खनन अधिकारी बिंदिया का कहना है कि विभाग अवैध खनन पर कार्रवाई कर रहा है। बल्ह के विभिन्न क्षेत्रों में 15 स्थानों पर अवैध रूप से एकत्र कर रखे रेत और बजरी के ढेरों को अपने कब्जे में लिया है। इनको नीलम करने की प्रक्रिया 11 जुलाई को होनी थी, लेकिन कानूनी नोटिस आने पर नीलामी प्रक्रिया रोकी गई है। अब कानूनी नोटिस का जवाब देने के बाद नीलामी करवाई जाएगी।