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Mandi News: देव परंपराओं को निभाने की जिम्मेदारी रहती है बजंतरियों पर

Tue, 17 Feb 2026 12:14 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 12:14 AM IST
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Bajantris are responsible for maintaining the traditions of the gods.
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव अवसर पर मंडी शहर के चौहटा बाजार में ढोल नगाड़ों को धूप में सु
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने पहुंचे देवी-देवताओं के साथ आए बजंतरियों पर न केवल देव परंपराओं को निभाने की जिम्मेदारी होती है, बल्कि अपने महंगे वाद्य यंत्रों की उचित देखरेख का दायित्व भी रहता है। देव अनुमति के अनुसार बजंतरियों को हर देव कारज, धार्मिक आयोजन और समारोह में शामिल होना पड़ता है, जिसके बदले उन्हें सीमित मानदेय और खान-पान की व्यवस्था दी जाती है।
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महाशिवरात्रि महोत्सव में सराज घाटी से देव बायला नारायण के साथ पहुंचे बजंतरी हंसराज, शेर सिंह, चंद्रमणी और धर्म सिंह ने बताया कि देवताओं के ढोल-नगाड़े विशेष रूप से करसोग, रामपुर और छतरी, आनी क्षेत्रों में तैयार करवाए जाते हैं। एक ढोल-नगाड़े के सेट पर करीब 30 हजार रुपये खर्च होते हैं। करनाल और नरसिंगों जैसे वाद्य यंत्रों की कीमत 40 से 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इन वाद्ययंत्रों पर चढ़े चमड़े के पूड़ को मौसम के अनुसार विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, ताकि उनकी ध्वनि की गुणवत्ता बनी रहे।
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बजंतरियों ने बताया कि सर्दी, गर्मी और बरसात में वाद्य यंत्रों को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होता है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में इन्हें धूप में सुखाना पड़ता है, तभी इनसे सही और मधुर ध्वनि निकलती है। महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान देवता के साथ बजंतरियों की दो टोलियां चलती हैं, जो करीब 40-40 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बारी-बारी से वादन करती हैं। इसके लिए देव समितियों की ओर से उन्हें 500 रुपये दिहाड़ी और खान-पान की व्यवस्था प्रदान की जाती है। बजंतरियों ने बताया कि वर्षभर देव समागम, देव कारज और शादी-विवाह जैसे आयोजनों में मंगलाचरण और देव ध्वनि प्रस्तुत कर ही उनका जीवनयापन चलता है। उन्होंने चिंता जताई कि सराज घाटी में देवी-देवताओं के प्रति लोगों की गहरी आस्था होने के बावजूद नई पीढ़ी की इस पारंपरिक कार्य में रुचि कम होती जा रही है। इससे आशंका है कि आने वाले समय में यह प्राचीन देव वादन और मंगलाचरण की परंपरा धीरे-धीरे लुप्त हो सकती है।
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