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कैंसर के लिए रामबाण है अश्वगंधा, मानसिक रोगों में भी असरदार : डॉ. अरुण चंदन

Wed, 03 Jul 2024 07:57 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Wed, 03 Jul 2024 07:57 PM IST
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Ashwagandha is a panacea for cancer, also effective in mental diseases: Dr. Arun Chandan
उत्तर भारत के सात राज्यों में चलेगा राष्ट्र स्तरीय अभियान, निशुल्क बांटे जाएंगे छह लाख पौधे
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संवाद न्यूज एजेंसी

जोगिंद्रनगर (मंडी)। क्षेत्रीय एवं सुगमता केंद्र उत्तर भारत जोगिंद्रनगर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अरुण चंदन ने कहा कि हिमाचल में कैंसर की गंभीर बीमारी के लिए अश्वगंधा की औषधि रामबाण साबित हुई है। मानसिक रोगों के लिए असरदार साबित हो चुकी है। उत्तर भारत में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए 7 राज्यों में करीब 6 लाख पौधे बांटकर राष्ट्र स्तरीय अभियान को शिखर पर चढ़ाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अश्वगंधा की जड़ में कई एल्केलाइड्स पाए जाते हैं। इनमें कुस्कोहाइग्रीन, एनाहाइग्रीन, ट्रोपीन, स्टुडोट्रोपीन, ऐनाफेरीन, आईसोपेलीन, टोरीन और तीन प्रकार के ट्रोपिलीटग्लोएट शामिल है। इनकी मात्रा 0.13 से 0.31 प्रतिशत तक होती है। इसके अलावा जड़ में स्टार्च, शर्करा, ग्लाइकोमाइड्स-हेट्रियाकाल्टेन, अलसिटॉल और विदनाल, तने में प्रोटीन तथा बहुत से अमीनो अम्ल भी पाए जाते हैं। इसमें रेशा बहुत कम तथा कैल्शियम और फासफोरस भी प्रचुर मात्रा होती है। इसके अलावा अश्वगंधा के फलों में प्रोटीन को पचाने वाला एन्जाइम कैमेस भी पाया जाता है।
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जोगिंद्रनगर में राष्ट्रीय अश्वगंधा अभियान का शुभारंभ करने के बाद डा. अरुण चंदन ने कहा कि अश्वगंधा के लगातार सेवन करने से शरीर के सारे विकार बाहर निकल जाते हैं। जलवायु की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र अश्वगंधा की खेती के लिए उपयुक्त है। अश्वगंधा की खेती समुद्रतल से 14 सौ मीटर से नीचे वाले क्षेत्रों में की जा सकती है। जड़ के रूप में यह पौधा हिमाचल प्रदेश के आठ जिलों बिलासपुर, ऊना, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, हमीरपुर और कुल्लू में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी रोपाई जुलाई नर्सरी के दो माह बाद की जा सकती है। प्रति एकड़ किसान आठ से 12 हजार रुपये के बीच में शुद्ध आय अर्जित कर सकता है।
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