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Mandi News: करसोग के आशा राम ने प्राकृतिक खेती से सुधारी आर्थिकी
Mon, 07 Oct 2024 05:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 07 Oct 2024 05:44 AM IST
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पांच बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती कर सालाना कमा रहा डेढ़ लाख
संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। उपमंडल के नरोली गांव के आशा राम ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाकर रसायन मुक्त अनाज की पैदावार की है। पांच बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती कर आशा राम सालाना डेढ़ लाख रुपये कमा रहे हैं।
आशा राम का कहना है कि उन्होंने 5.5 बीघा भूमि पर सुभाष पालेकर खेती शुरू कर गेंहू, मटर, राजमाह, मक्का, पुराने अनाज, गोभी, सरसों, जौ आदि फसलों की पैदावार शुरू की। इसके साथ ही इसी जमीन पर अनार का बागीचा भी लगाया है। इसमें मृदुला, कंधारी, कंधारी काबुली, सीड लेस डोलका किस्मों के अनार लगाए हैं और इसके बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। अनार की तैयार फसल को क्षेत्र के सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारी ही खरीद लेते हैं, जिससे उनकी अच्छी आय हो रही है। अनार से ही वह सालाना 80-90 हजार की आय अर्जित कर रहे हैं। अन्य फसलों से होने वाली आय अलग से है।
आशा राम का कहना है कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाने से पूर्व 5.5 बीघा जमीन पर रसायनों के छिड़काव और खाद आदि पर लगभग 22 से 25 हजार खर्च आता था, जो अब प्राकृतिक खेती करने से 3 से 4 हजार रुपये प्रति माह आ रहा है। इस खेती से मिट्टी की दशा में भी सुधार हुआ है और जमीन में मित्र कीटों की संख्या बढ़ रही है। इस बारे में आत्मा परियोजना के उप निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि किसान अब प्राकृतिक खेती से जुड़ कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। इसके लिए विभाग से भी उन्हें मदद दी जाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। उपमंडल के नरोली गांव के आशा राम ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाकर रसायन मुक्त अनाज की पैदावार की है। पांच बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती कर आशा राम सालाना डेढ़ लाख रुपये कमा रहे हैं।
आशा राम का कहना है कि उन्होंने 5.5 बीघा भूमि पर सुभाष पालेकर खेती शुरू कर गेंहू, मटर, राजमाह, मक्का, पुराने अनाज, गोभी, सरसों, जौ आदि फसलों की पैदावार शुरू की। इसके साथ ही इसी जमीन पर अनार का बागीचा भी लगाया है। इसमें मृदुला, कंधारी, कंधारी काबुली, सीड लेस डोलका किस्मों के अनार लगाए हैं और इसके बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। अनार की तैयार फसल को क्षेत्र के सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारी ही खरीद लेते हैं, जिससे उनकी अच्छी आय हो रही है। अनार से ही वह सालाना 80-90 हजार की आय अर्जित कर रहे हैं। अन्य फसलों से होने वाली आय अलग से है।
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आशा राम का कहना है कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाने से पूर्व 5.5 बीघा जमीन पर रसायनों के छिड़काव और खाद आदि पर लगभग 22 से 25 हजार खर्च आता था, जो अब प्राकृतिक खेती करने से 3 से 4 हजार रुपये प्रति माह आ रहा है। इस खेती से मिट्टी की दशा में भी सुधार हुआ है और जमीन में मित्र कीटों की संख्या बढ़ रही है। इस बारे में आत्मा परियोजना के उप निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि किसान अब प्राकृतिक खेती से जुड़ कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। इसके लिए विभाग से भी उन्हें मदद दी जाती है।
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