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Mandi News: वनों को आग से बचाने के इंतजाम फाइलों तक सीमित, न दिख रहे फायर वाचर, न कमेटियां

Mon, 10 Jun 2024 07:28 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2024 07:28 PM IST
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Arrangements to protect forests from fire are limited to files, neither fire watchers nor committees are visible.
जिले में धू-धू कर जल रहे जंगल, आग की घटनाओं पर नहीं हो रही गिरफ्तारी और कार्रवाई
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अब तक करोड़ों की वन संपदा राख
दुनी चंद भारद्वाज

बालीचौकी (मंडी)। प्रदेश के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं और करोड़ों रुपये की वन संपदा राख हो रही है, लेकिन वन विभाग और प्रशासन की ओर से आग की घटनाओं से निटपने के लिए किए गए इंतजाम कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। जंगलों में हर दिन आग की घटनाएं हो रही है। आग न केवल जंगल और वन संपदा को नष्ट कर रही है, बल्कि जीव जंतुओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, सायद ही ऐसा कोई स्थान बचा होगा, जहां आग न लगी होगी।
प्रदेश में वनों की आग लगने पर सुरक्षा के सारे प्रबंध धरे के धरे रह जाते हैं। आग के मामले रोजनामचे में दर्ज होते हैं और वन विभाग और पुलिस की फाइल में सिमट कर रह जाते है। वनों में आग जान-बूझकर लगाए जाने के बावजूद न कोई गिरफ्तारी और न कोई कार्रवाई होती है। वनों की आग पर सारे प्रबंध और दावे पानी फेर रहे हैं। कहने को तो वन विभाग ने फायर वाचर भी रखे हैं और ग्रामीण स्तर पर कमेटियां भी बनाई हैं, लेकिन जब वनों में आग लगती है, तक सब गायब होते हैं। इस साल भी धू-धू कर जंगल जल रहे हैं। आग की घटनाओं और फायर सीजन के कारण अग्निशमन कर्मियों की छुट्टियों को रद्द किया गया है। जंगलों की आग बुझाने में सबसे बड़ी समस्या तब आ रही है, जब जंगल में जाने के लिए सड़कें न होने के कारण वहां तक गाड़ी नहीं पहुंच रही है। इसके अलावा जगह-जगह जंगलों में लगी आग को बुझाने में न तो वन विभाग के फायर वाचर नजर आ रहे और न ही वनों में फायर लाइन नजर आती है। अभी तक प्रदश भर में 1682 आग की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार और विभाग की ओर से आग बुझाने के दावों को धरातल पर नहीं उतारा है। अगर इसी तरफ से वनों में जंगलों में आग का सिलसिला जारी रहा तो मुश्किलें बढ़ेंगी।
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इस संबंध में डीएफओ नाचन एाएस कश्यप ने कहा कि वनों में आग लगाने वालों पर कार्रवाई की जाती है। आग लगाने वाले का पता चलने पर एफआईआर भी दर्ज करवाई जाती है। अधिकतर घटनाएं लोगों की लापरवाही से होती हैं। उन्होंने जंगलों को आग से बचाने के लिए सहयोग की अपील की है।
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