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Mandi News: सेब के पेड़ों पर पत्ते ज्यादा और फूल कम, पैदावार गिरने की आशंका से बागवान चिंतित

Wed, 10 Apr 2024 11:04 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Wed, 10 Apr 2024 11:04 AM IST
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Apple trees have more leaves and less flowering
मंडी जिला की कमरूघाटी में अप्रैल माह में भी बिना फ्लावरिंग के सेब बगीचे। संवाद
गोहर (मंडी)। 35 लाख सेब पेटी उत्पादन करने वाले मंडी जिला की लोअर और मिडल सेब बैल्ट में इस साल सेब बगीचों में पत्ते अधिक और फूल कम निकले हैं। इससे हजारों सेब बागवान चिंतित हो गए हैं। अप्रैल के नौ दिन बीत गए हैं, लेकिन करसोग, नाचन और सिराज में ऐसे सैकड़ों बगीचे हैं जहां पिंक बड (गुलाबी कली) स्टेज भी शुरू नहीं हो सकी है।
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बागवानी विशेषज्ञ इसे चिलिंग आवर्स पूरे न होना, बीते वर्ष समय से से पहले पतझड़, पूर्व में अधिक फसल का होना और सेब पौधों में पुराने स्परों का अधिक होना कारण मान रहे हैं। इस साल ठंड का प्रकोप अप्रैल तक रहने से गुठलीदार फलों पर भी कम सेटिंग हुई है। वहीं, अधिकतर सेब बगीचों में फ्लावरिंग पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि बगीचों में पर्याप्त मात्रा में नमी भी है।
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करसोग, चुराग, पांगणा, चरखडी, शकोहर, रोहांडा, बाढु, कुटाहची, सरोआ, जबाल, फंग्यार, सलाहर, काढां, बगस्याड, थुनाग समेत अनेक स्थानों पर अनेक सेब बगीचों में यह समस्या पेश आई है। नाचन फल सब्जी उत्पादक संघ के उपाध्यक्ष प्रेम ठाकुर, और सिराज फल सब्जी उत्पादक संघ के प्रधान चतर सिंह ठाकुर ने बताया कि इस बार कई बागवानों के बगीचों में फ्लावरिंग कम और पत्ते अधिक निकले हैं। मंडी जिला के अलावा ऊपरी शिमला और कुल्लू में भी बागवानों को यह समस्या पेश आई है।
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बागवानों प्रेम ठाकुर, यादविंदर ठाकुर, हेमराज, चंद्रमणी, डोलेराम, जीत कुमार, लीला प्रकाश, हेम सिंह, यशवंत ठाकुर, परमा राम, रमेश ठाकुर, अरुण, दुष्यंत, दुर्गा सिंह, मनोज ठाकुर और नेत्र सिंह ठाकुर ने बताया कि उनके बगीचों में इस साल फ्लावरिंग पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

उधर, उद्यान उपनिदेशक मंडी डॉ संजय गुप्ता ने कहा कि नवंबर दिसंबर के बजाए जनवरी फरवरी में हो रही बर्फबारी और चिलिंग आवर्स पूरे न होना इसका बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि सेब बागवान अगर विभाग को शिकायत करते हैं तो विभाग अपनी टीम प्रभावित क्षेत्रों में भेजेगा। वहीं, बागवानी विशेषज्ञ डॉ एसपी भारद्वाज ने बताया कि बीते वर्ष समय पूर्व पतझड़ और पूर्व में अत्याधिक फसल इस समस्या का कारण है। कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से भी बागवानी प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
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