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Mandi News: आर्यभट्ट कॉलेज में कला संकाय के सभी पद रिक्त
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बंद होने से बचे कॉलेज में 4 साल से खाली हैं पद
शिक्षाविदों ने बढ़ाया मदद का हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
संधोल (मंडी)। आर्यभट्ट राजकीय महाविद्यालय संधोल में शिक्षकों की कमी के कारण नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। महाविद्यालय में प्राचार्य सहित आर्ट्स स्ट्रीम (कला संकाय) के कई महत्वपूर्ण विषयों के प्राध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं। संगीत विषय का पद महाविद्यालय की शुरुआत से ही खाली है, जबकि समाजशास्त्र का पद पिछले चार वर्षों, अंग्रेजी का दो वर्षों और इतिहास का एक वर्ष से रिक्त चल रहा है। अनिवार्य भाषा हिंदी और अंग्रेजी के शिक्षक उपलब्ध न होने के कारण नए विद्यार्थी दाखिला लेने से भी हिचकिचा रहे हैं। जनता के भारी विरोध के बाद सरकार ने महाविद्यालय बंद करने का निर्णय वापस ले लिया था लेकिन शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी अब भी दूर नहीं हो पाई है। इस संकट के बीच क्षेत्र के शिक्षाविद डॉ. त्रिलोक सिंह भनवाल ने सराहनीय पहल करते हुए महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के एक वर्ष का शैक्षणिक खर्च स्वयं उठाने की घोषणा की है। वहीं, सेवानिवृत्त प्राचार्य दिनेश जम्वाल विद्यार्थियों के लिए निशुल्क पर्सनेलिटी डेवलपमेंट कक्षाएं संचालित करेंगे। संधोल सेवा विकास एवं कल्याण समिति के अध्यक्ष मान सिंह और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि महाविद्यालय में तत्काल प्राचार्य और प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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शिक्षाविदों ने बढ़ाया मदद का हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
संधोल (मंडी)। आर्यभट्ट राजकीय महाविद्यालय संधोल में शिक्षकों की कमी के कारण नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। महाविद्यालय में प्राचार्य सहित आर्ट्स स्ट्रीम (कला संकाय) के कई महत्वपूर्ण विषयों के प्राध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं। संगीत विषय का पद महाविद्यालय की शुरुआत से ही खाली है, जबकि समाजशास्त्र का पद पिछले चार वर्षों, अंग्रेजी का दो वर्षों और इतिहास का एक वर्ष से रिक्त चल रहा है। अनिवार्य भाषा हिंदी और अंग्रेजी के शिक्षक उपलब्ध न होने के कारण नए विद्यार्थी दाखिला लेने से भी हिचकिचा रहे हैं। जनता के भारी विरोध के बाद सरकार ने महाविद्यालय बंद करने का निर्णय वापस ले लिया था लेकिन शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी अब भी दूर नहीं हो पाई है। इस संकट के बीच क्षेत्र के शिक्षाविद डॉ. त्रिलोक सिंह भनवाल ने सराहनीय पहल करते हुए महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के एक वर्ष का शैक्षणिक खर्च स्वयं उठाने की घोषणा की है। वहीं, सेवानिवृत्त प्राचार्य दिनेश जम्वाल विद्यार्थियों के लिए निशुल्क पर्सनेलिटी डेवलपमेंट कक्षाएं संचालित करेंगे। संधोल सेवा विकास एवं कल्याण समिति के अध्यक्ष मान सिंह और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि महाविद्यालय में तत्काल प्राचार्य और प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।