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Mandi News: धान की फसल को बीमारियों से बचाने के लिए कृषि विभाग सतर्क
Thu, 11 Jul 2024 05:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 11 Jul 2024 05:43 AM IST
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मंडी। जिला मंडी में धान की फसलों को बीमारियों और कीटों के हमले से बचाने के लिए पूरी तरह से गंभीर है। इसके लिए किसानों को धान की फसल में प्रयोग होने वाली दवाइयां उचित समय पर उचित दामों पर उपलब्ध करवाने में विभाग जुट गया है। जिला के सभी कृषि खंडों से किसानों की मांग के मुताबिक कृषि उपनिदेशक कार्यालय मंडी ने निदेशालय को दवाइयों की मांग भेज दी है। इसमें सबसे अधिक धान की दवाइयों की डिमांड की गई है।
जिला में धान की खेती करीब 14,900 हेक्टेयर जमीन पर की जाती है और हर बार अधिक बारिश या कम बारिश के चलते धान की खेती में बहुत-सी बीमारियां, खरपतवार और कीट खराब कर जाते हैं। इससे किसानों को बहुत अधिक नुकसान होता है। धान की फसलों को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगों में जीवाणु पर्ण, अंगमारी रोग, पर्ण झुलसा, पत्ती का झुलसा रोग, ब्लास्ट या झोंका रोग, खैरा रोग, बकानी रोग, स्टेम बोरर कीट, लीफ फोल्ड कीट, हॉपर, ग्रॉस हॉपर, सैनिक कीट आदि होते हैं।
हर साल इन बीमारियों के कारण खेतों में फसलें समय से पहले पक जाती हैं। धान में दाना नहीं आता और पौधे सूख जाते हैं। कई बार रोग लगने के कारण धान के पौधे में फसल आती ही नहीं है। वहीं, फसल अगर अच्छी हो जाए तो बहुत से कीट और चूहे आदि धान की फसल को तबाह कर देते हैं। ऐसे में उचित समय में दवाइयों को छिड़काव कर इनसे बचा जा सकता है।
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कृषि उपनिदेशक मंडी आरसी चौधरी ने बताया कि जिला में धान की फसल को बचाने के लिए विभाग गंभीर है और किसानों को उचित मूल्य पर बेहतर दवाएं समय पर उपलब्ध करवाई जाएंगी।
दवाएं और उनकी मांग
जिला में धान की दवाई बूटाक्लोर की 1032 लीटर, खरपतबार नाशक पैंडीमेथालीन 750 लीटर, कीटनाशक साइपरमैथरीन 490 लीटर, क्लोफाइपॉस 320 लीटर, फफूंदनाशक 677 किलोग्राम, सुपर 505 375 लीटर, फफूंदनाशक 1682 किलोग्राम की मांग निदेशालय से की गई है।
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जिला में धान की खेती करीब 14,900 हेक्टेयर जमीन पर की जाती है और हर बार अधिक बारिश या कम बारिश के चलते धान की खेती में बहुत-सी बीमारियां, खरपतवार और कीट खराब कर जाते हैं। इससे किसानों को बहुत अधिक नुकसान होता है। धान की फसलों को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगों में जीवाणु पर्ण, अंगमारी रोग, पर्ण झुलसा, पत्ती का झुलसा रोग, ब्लास्ट या झोंका रोग, खैरा रोग, बकानी रोग, स्टेम बोरर कीट, लीफ फोल्ड कीट, हॉपर, ग्रॉस हॉपर, सैनिक कीट आदि होते हैं।
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हर साल इन बीमारियों के कारण खेतों में फसलें समय से पहले पक जाती हैं। धान में दाना नहीं आता और पौधे सूख जाते हैं। कई बार रोग लगने के कारण धान के पौधे में फसल आती ही नहीं है। वहीं, फसल अगर अच्छी हो जाए तो बहुत से कीट और चूहे आदि धान की फसल को तबाह कर देते हैं। ऐसे में उचित समय में दवाइयों को छिड़काव कर इनसे बचा जा सकता है।
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कृषि उपनिदेशक मंडी आरसी चौधरी ने बताया कि जिला में धान की फसल को बचाने के लिए विभाग गंभीर है और किसानों को उचित मूल्य पर बेहतर दवाएं समय पर उपलब्ध करवाई जाएंगी।
दवाएं और उनकी मांग
जिला में धान की दवाई बूटाक्लोर की 1032 लीटर, खरपतबार नाशक पैंडीमेथालीन 750 लीटर, कीटनाशक साइपरमैथरीन 490 लीटर, क्लोफाइपॉस 320 लीटर, फफूंदनाशक 677 किलोग्राम, सुपर 505 375 लीटर, फफूंदनाशक 1682 किलोग्राम की मांग निदेशालय से की गई है।