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Mandi News: नगर निगम ने चार माह बाद दोबारा भेज दिए गृहकर के बिल, शहरवासियों में रोष
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बोले, एकमुश्त गृहकर अदा करना मुश्किल, नगर निगम पर लगाया तानाशाही का आरोप
अधिकारी पदाधिकारी बाेले मजबूरी, कर जमा नहीं किया तो रुक जाएगी ग्रांट
हरदेव कुमार
मंडी। नगर निगम की ओर से इस बार चार माह में दूसरी बार गृहकर के बिल भेजने से शहरवासियों में रोष है। लोगों का कहना है कि चार माह पहले ही कर दिया है, अब दोबारा इतने कम अंतराल में कर वसूलना तर्कसंगत नहीं है। पहले साल में एक बार भी गृहकर देना पड़ता था। उनका कहना है कि कर देना तो है, लेकिन अभी इतनी जल्दी एकमुश्त कर देने में अधिकतर लोग असमर्थ हैं।
कहा कि शहर में अधिकतर लोग इतने साधन संपन्न नहीं हैं कि वह चार माह के बाद दोबारा कर दे सकें। उधर, इस बात पर नगर निगम के अधिकारियों और पदाधिकारियों का कहना है कि यह कर 2022-23 का है। पहले वसूला गया कर पिछले साल का है अगर यह कर जल्द जमा नहीं करवाया तो नगर निगम की ग्रांट रुक सकती है ,ऐसे में कर वसूला जा रहा है। इधर लोगों का कहना है कि अभी अप्रैल माह में ही शहर के लोगों ने 2021-22 का गृहकर जमा करवाया है, अब मात्र चार माह के अंतराल में दूसरी बार गृहकर थमा देना निगम प्रबंधन की तानाशाही को दर्शाता है। यदि निगम की ओर से इस वर्ष के अंत में गृहकर वसूली की जाती तो लोगों को इसे अदा करने में कोई परेशानी नहीं होती। बता दें कि मंडी शहर में करीब 8 हजार गृहकर दाता हैं और अगले साल नए मर्ज इलाकों पर भी गृहकर देना पड़ेगा। संवाद
अप्रैल में लिया है पिछले साल का गृहकर
इस बारे नगर निगम के उप महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा ने बताया कि निगम की ओर से पूर्व में वर्ष 21-22 का टैक्स दिया गया था, लेकिन अब 2023 का टैक्स वसूला जा रहा है। निगम को डायरेक्टरेट से निर्देश दिए गए हैं कि शीघ्र गृहकर वसूली न होने पर निगम को मिलने वाली ग्रांट काट दी जाएगी। ऐसे में कर तो सभी को देना ही होगा।
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क्या कहते हैं शहरवासी
चार माह के अंतराल में गृहकर वसूलना समझ से परे है। गृहकर अदायगी तो करनी ही है, लेकिन अच्छा होता अगर इसे वर्ष के अंत में लिया जाता। देखा देखी तो सभी लोग किसी तरह गृहकर अदा कर ही देंगे, लेकिन उनकी तरह बेरोजगारों के लिए अदायगी करना मुश्किल होगा। निगम प्रबंधन को कोई समाधान निकाला चाहिए। -इंद्रपाल, रंगकर्मी
- परिवार की हालत इतनी अच्छी नहीं है कि बार-बार गृहकर अदा किया जा सके। रोजाना दिहाड़ी लगाकर परिवार का पोषण करते हैं। कई बार काम भी नहीं मिलता, ऊपर से बच्चों की शिक्षा, परिवार की जरूरतें, राशन आदि का खर्च मुश्किल से निकलता है। निगम को चाहिए कि दिसंबर या जनवरी माह में गृहकर लिया जाए। -जय कुमार, निवासी सुहड़ा
- दो कमरों के मकान का 700 से 800 रुपये गृहकर वसूलना उचित नहीं है, मकान हमारे, जमीनें हमारी, तो निगम को किस बात का टेस्ट दें। पहले ही बिजली, पानी, सीवरेज और गारबेज क्लेक्शन की वसूली क्या कम है। उस पर कूड़े वाले नियमित रूप से भी कूड़ा नहीं उठाते, जनता तो बस एक-दूसरे से रोष जता सकती। - धर्मी देवी, प्रधान महिला मंडल रविनगर
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अधिकारी पदाधिकारी बाेले मजबूरी, कर जमा नहीं किया तो रुक जाएगी ग्रांट
हरदेव कुमार
मंडी। नगर निगम की ओर से इस बार चार माह में दूसरी बार गृहकर के बिल भेजने से शहरवासियों में रोष है। लोगों का कहना है कि चार माह पहले ही कर दिया है, अब दोबारा इतने कम अंतराल में कर वसूलना तर्कसंगत नहीं है। पहले साल में एक बार भी गृहकर देना पड़ता था। उनका कहना है कि कर देना तो है, लेकिन अभी इतनी जल्दी एकमुश्त कर देने में अधिकतर लोग असमर्थ हैं।
कहा कि शहर में अधिकतर लोग इतने साधन संपन्न नहीं हैं कि वह चार माह के बाद दोबारा कर दे सकें। उधर, इस बात पर नगर निगम के अधिकारियों और पदाधिकारियों का कहना है कि यह कर 2022-23 का है। पहले वसूला गया कर पिछले साल का है अगर यह कर जल्द जमा नहीं करवाया तो नगर निगम की ग्रांट रुक सकती है ,ऐसे में कर वसूला जा रहा है। इधर लोगों का कहना है कि अभी अप्रैल माह में ही शहर के लोगों ने 2021-22 का गृहकर जमा करवाया है, अब मात्र चार माह के अंतराल में दूसरी बार गृहकर थमा देना निगम प्रबंधन की तानाशाही को दर्शाता है। यदि निगम की ओर से इस वर्ष के अंत में गृहकर वसूली की जाती तो लोगों को इसे अदा करने में कोई परेशानी नहीं होती। बता दें कि मंडी शहर में करीब 8 हजार गृहकर दाता हैं और अगले साल नए मर्ज इलाकों पर भी गृहकर देना पड़ेगा। संवाद
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अप्रैल में लिया है पिछले साल का गृहकर
इस बारे नगर निगम के उप महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा ने बताया कि निगम की ओर से पूर्व में वर्ष 21-22 का टैक्स दिया गया था, लेकिन अब 2023 का टैक्स वसूला जा रहा है। निगम को डायरेक्टरेट से निर्देश दिए गए हैं कि शीघ्र गृहकर वसूली न होने पर निगम को मिलने वाली ग्रांट काट दी जाएगी। ऐसे में कर तो सभी को देना ही होगा।
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क्या कहते हैं शहरवासी
चार माह के अंतराल में गृहकर वसूलना समझ से परे है। गृहकर अदायगी तो करनी ही है, लेकिन अच्छा होता अगर इसे वर्ष के अंत में लिया जाता। देखा देखी तो सभी लोग किसी तरह गृहकर अदा कर ही देंगे, लेकिन उनकी तरह बेरोजगारों के लिए अदायगी करना मुश्किल होगा। निगम प्रबंधन को कोई समाधान निकाला चाहिए। -इंद्रपाल, रंगकर्मी
- परिवार की हालत इतनी अच्छी नहीं है कि बार-बार गृहकर अदा किया जा सके। रोजाना दिहाड़ी लगाकर परिवार का पोषण करते हैं। कई बार काम भी नहीं मिलता, ऊपर से बच्चों की शिक्षा, परिवार की जरूरतें, राशन आदि का खर्च मुश्किल से निकलता है। निगम को चाहिए कि दिसंबर या जनवरी माह में गृहकर लिया जाए। -जय कुमार, निवासी सुहड़ा
- दो कमरों के मकान का 700 से 800 रुपये गृहकर वसूलना उचित नहीं है, मकान हमारे, जमीनें हमारी, तो निगम को किस बात का टेस्ट दें। पहले ही बिजली, पानी, सीवरेज और गारबेज क्लेक्शन की वसूली क्या कम है। उस पर कूड़े वाले नियमित रूप से भी कूड़ा नहीं उठाते, जनता तो बस एक-दूसरे से रोष जता सकती। - धर्मी देवी, प्रधान महिला मंडल रविनगर