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चरस रखने का आरोप साबित न होने पर बरी
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मंडी। चरस के साथ पकड़े जाने का अभियोग साबित न होने पर अदालत ने एक आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश की विशेष अदालत ने हरियाणा के जिला सोनीपत के चिडाना (गोहाना) निवासी नरेंद्र सिंह पुत्र सतबीर सिंह के खिलाफ एनडीपीएस की धारा 20 के तहत अभियोग साबित न होने के कारण उसे बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 अक्तूबर 2011 को पुलिस का दल सुक्कीबाईं में तैनात था। इसी दौरान आरोपी मंडी की ओर आ रहा था। आरोपी ने पुलिस दल को देख भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे धर लिया। आरोपी से 600 ग्राम चरस बरामद हुई थी।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज कर तहकीकात शुरू की थी। अदालत में अभियोग चलाया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 10 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय की व्यवस्थाओं के अनुसार एनडीपीएस की धारा 50 के प्रावधानों को लागू करना आवश्यक है। आरोपी को उसकी शारीरिक तलाशी से पहले न सिर्फ उसके कानूनी अधिकारों के बारे में बताया जाना चाहिए बल्कि उसे आवश्यक रूप से तलाशी के लिए राजपत्रित अधिकारी या मैजिस्ट्रेट के पास ले जाना जरूरी है।
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अदालत ने कहा कि आवश्यक प्रावधानों की अवहेलना अभियोजन पक्ष के लिए घातक साबित होती है। मामले में भी इन आवश्यक प्रावधानों की अवहेलना की गई है और इन प्रावधानों के उल्लंघन के कारण बरामदगी को साबित नहीं किया जा सकता। इसके चलते अदालत ने आरोपी के खिलाफ चरस बरामदगी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित नहीं होने पर उसे बरी करने का फैसला सुनाया है। संवाद
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 अक्तूबर 2011 को पुलिस का दल सुक्कीबाईं में तैनात था। इसी दौरान आरोपी मंडी की ओर आ रहा था। आरोपी ने पुलिस दल को देख भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे धर लिया। आरोपी से 600 ग्राम चरस बरामद हुई थी।
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पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज कर तहकीकात शुरू की थी। अदालत में अभियोग चलाया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 10 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय की व्यवस्थाओं के अनुसार एनडीपीएस की धारा 50 के प्रावधानों को लागू करना आवश्यक है। आरोपी को उसकी शारीरिक तलाशी से पहले न सिर्फ उसके कानूनी अधिकारों के बारे में बताया जाना चाहिए बल्कि उसे आवश्यक रूप से तलाशी के लिए राजपत्रित अधिकारी या मैजिस्ट्रेट के पास ले जाना जरूरी है।
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अदालत ने कहा कि आवश्यक प्रावधानों की अवहेलना अभियोजन पक्ष के लिए घातक साबित होती है। मामले में भी इन आवश्यक प्रावधानों की अवहेलना की गई है और इन प्रावधानों के उल्लंघन के कारण बरामदगी को साबित नहीं किया जा सकता। इसके चलते अदालत ने आरोपी के खिलाफ चरस बरामदगी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित नहीं होने पर उसे बरी करने का फैसला सुनाया है। संवाद