मंडी। जंजैहली थाना क्षेत्र के रुच्हड़ में 3570 अफीम के पौधों की कथित खेती के मामले में विशेष न्यायाधीश मंडी की अदालत ने 66 वर्षीय व्यक्ति को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि अफीम की खेती आरोपी ने ही की थी। पुलिस के अनुसार, चार जून 2020 को रुच्हड़ स्थित एक सेब के बगीचे से अफीम के 3570 पौधे बरामद किए गए थे। मौके से 20 पौधों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। पुलिस ने शुरुआत में खेती वाली जमीन का खसरा नंबर 190 बताया था लेकिन बाद में राजस्व विभाग की निशानदेही में यह खसरा नंबर 193 पाया गया।
अदालत में राजस्व अधिकारियों की गवाही से सामने आया कि खसरा नंबर 193 कई सह-हिस्सेदारों की संयुक्त और अविभाजित भूमि है। अधिकारी आरोपी के इस जमीन पर विशेष कब्जे की पुष्टि नहीं कर सके। वहीं, कई सह-हिस्सेदारों ने भी अदालत में बयान दिया कि उन्होंने आरोपी को इस जमीन पर खेती करते नहीं देखा था। अभियोजन पक्ष आरोपी के कब्जे और अफीम की खेती से उसके संबंध को साबित करने के लिए कोई ठोस सरकारी रिकॉर्ड भी पेश नहीं कर सका। अदालत ने माना कि आरोपी को अफीम की खेती से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके चलते 66 वर्षीय व्यक्ति को एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 के तहत लगाए गए आरोप से बरी कर दिया गया।