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जोगिंद्रनदर-पठानकोट रेलमार्ग के नहीं बदले दिन
Mandi
Updated Wed, 09 Jul 2014 05:32 AM IST
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। देश की सुरक्षा में अहम रोल अदा करने वाली और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली अंग्रेजों के जमाने की जोगिंद्रनगर-पठानकोट रेलमार्ग के ब्राडगेज और नवीनीकरण का मामला फिर खटाई में पड़ गया। रेल बजट पेश होने से पहले लोगों में उत्साह था कि मोदी सरकार इस रेल लाइन के विस्तार को लेकर तोहफा देगी।
जनता का कहना था कि कुछ भी हो जाए पर अब की बार इस रेल मार्ग के दिन बदलने वाले हैं। लेकिन रेल बजट के पेश होते ही लोगों को मायूसी हाथ लगी। बजट में प्रदेश के मुख्य दो रेल मार्गों का जिक्र तक नहीं किया गया। सुरक्षा और पर्यटन में अहम रोल अदा करने वाली जोगिंद्रनगर-पठानकोट ट्रेन आज भी पुराने अंग्रेजों के जमाने में बनाए रेलवे ट्रैक पर ही चलने के लिए मजबूर हैं। हर बार चुनावी गलियारों में इस रेलमार्ग के विस्तारीकरण, नवीनीकरण और इसके ब्राडगेज करने के वायदे केवल चुनावों तक ही सीमित होकर रह जाते हैं।
इस बार भी लोस चुनाव में सियासी दलों के प्रत्याशियों ने रेल मुद्दे को उठाया था। कई बार रेल मंत्रालय ने भी पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग के विस्तारीकरण को लेकर मंडी तक इस रेल को पहुंचाने के लिए सर्वे किया लेकिन, वो भी कागजों तक ही सीमित हो कर रह गया। रेल लाइन को देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी भारत मंत्रालय ने अहम मानते हुए इसे यहां से लेह तक ले जाने पर विचार किया लेकिन वो भी यहीं तक ही सिमट कर रह गया।
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जनता का कहना था कि कुछ भी हो जाए पर अब की बार इस रेल मार्ग के दिन बदलने वाले हैं। लेकिन रेल बजट के पेश होते ही लोगों को मायूसी हाथ लगी। बजट में प्रदेश के मुख्य दो रेल मार्गों का जिक्र तक नहीं किया गया। सुरक्षा और पर्यटन में अहम रोल अदा करने वाली जोगिंद्रनगर-पठानकोट ट्रेन आज भी पुराने अंग्रेजों के जमाने में बनाए रेलवे ट्रैक पर ही चलने के लिए मजबूर हैं। हर बार चुनावी गलियारों में इस रेलमार्ग के विस्तारीकरण, नवीनीकरण और इसके ब्राडगेज करने के वायदे केवल चुनावों तक ही सीमित होकर रह जाते हैं।
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इस बार भी लोस चुनाव में सियासी दलों के प्रत्याशियों ने रेल मुद्दे को उठाया था। कई बार रेल मंत्रालय ने भी पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग के विस्तारीकरण को लेकर मंडी तक इस रेल को पहुंचाने के लिए सर्वे किया लेकिन, वो भी कागजों तक ही सीमित हो कर रह गया। रेल लाइन को देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी भारत मंत्रालय ने अहम मानते हुए इसे यहां से लेह तक ले जाने पर विचार किया लेकिन वो भी यहीं तक ही सिमट कर रह गया।
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