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प्रतिमा निर्माण में धारा 118 का उल्लंघन नहीं

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
Mandi
Mandi Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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मंडी। धार्मिक त्रिवेणी रिवालसर में बनाई गई गुरु पदम संभव की विशालकाय प्रतिमा के निर्माण में धारा 118 का उल्लंघन नहीं हुआ। मंडलायुक्त मंडी आर डी नजीम ने इस बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निर्माण को उचित ठहराया है। उन्होंने उपायुक्त मंडी को धारा 118 के तहत दी गई अनुमति दुरुस्त करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि रिवालसर स्थित जिगर द्रुपक कदियुत संस्था ने गुरू पदम संभव (दूसरा बुद्ध) की भव्य प्रतिमा बनाने के लिए प्रदेश सरकार के पास आवेदन किया था। सरकार की ओर से धारा 118 के तहत संस्था को भगवान बुद्ध की प्रतिमा बनाने के आदेश दिये थे।
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रिवालसर निवासी महेंद्र कुमार ने उपायुक्त को अर्जी दी थी कि संस्था ने रिवालसर में अनुमति का उल्लंघन करते हुए भगवान बुद्ध की जगह गुरू पदम संभव की प्रतिमा लगा दी है। उपायुक्त ने उपमंडल अधिकारी सदर को इस बारे में जांच के आदेश दिये थे। उपमंडल अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि संस्था ने धारा 118 की अनुमति का उल्लंघन किया है। जिसके चलते उपायुक्त न्यायालय ने संस्था को तलब किया था। उपायुक्त न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि संस्था ने भगवान बुद्ध की जगह गुरू पदम संभव की प्रतिमा बनाकर धारा 118 की अनुमति का उल्लंघन किया है। न्यायालय ने अनुमति वापस लेने के आदेशों के साथ ही उपमंडल अधिकारी सदर को प्रतिमा की भूमि वाली जगह को अपने कब्जे में लेने और प्रतिमा वाली जगह के सारे सामान की सूची तैयार करने के आदेश दिये थे।
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संस्था ने उपायुक्त के फैसले के खिलाफ मंडलायुक्त न्यायालय में अपील दायर की थी। संस्था के अधिवक्ता आर के शर्मा के अनुसार आरटीआई के माध्यम से जानकारी से स्पष्ट हुआ कि संस्था ने भगवान बुध की प्रतिमा के लिए अनुमति नहीं मांगी थी बल्कि गुरू पदम संभव (दूसरा बुद्ध) की प्रतिमा के लिए अनुमति को आवेदन किया था। पदम संभव को बौद्ध धर्म में दूसरा बुद्ध माना जाता है। इधर संपर्क करने पर मंडलायुक्त आरडी नजीम ने फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि अनुमति में जरूरी बदलाव के लिए उपायुक्त को निर्देश दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से गुरू पदम संभव की प्रतिमा के लिए ही आवेदन किया गया था। लेकिन उन्हें गलती से भगवान बुद्ध की प्रतिमा के लिए अनुमति दी गई है।
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