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न्यायालय में झूठी गवाही देना पड़ी महंगी
Mandi
Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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मंडी। रिश्वत के आरोप में जहां पटवारी को अदालत ने दो साल की कैद और बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं मामले के मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता के खिलाफ भी न्यायालय ने कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। उक्त दोनों पर न्यायालय में झूठ बोलने के चलते कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता और मामले के मुख्य गवाह को न्यायालय में झूठ बोलना महंगा पड़ गया। मामले के मुख्य गवाह न्यायालय में अपनी गवाही से पलट गया था। जबकि शिकायतकर्ता भी अपने बयान से मुकर गया था। लेकिन विजिलेंस के ओर से मामले की पैरवी करते हुए सरकारी अधिवक्ता एनसी कटोच ने न्यायालय में मुख्य गवाह और शिकायकर्ता के झूठ को सिद्ध कर दिया। सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि अगर शिकायतकर्ता ने आरोपी पटवारी को दो हजार रुपये रिश्वत नहीं दी थी तो उसने सरकारी धन की रिंबरसमेंट क्यों ली। इसको सही मानते हुए न्यायालय ने जहां आरोपी पटवारी को दो साल की जेल और 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने के आदेश जारी किए वहीं गवाह और शिकायतकर्ता के खिलाफ न्यायालय में झूठ बोलने पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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शिकायतकर्ता और मामले के मुख्य गवाह को न्यायालय में झूठ बोलना महंगा पड़ गया। मामले के मुख्य गवाह न्यायालय में अपनी गवाही से पलट गया था। जबकि शिकायतकर्ता भी अपने बयान से मुकर गया था। लेकिन विजिलेंस के ओर से मामले की पैरवी करते हुए सरकारी अधिवक्ता एनसी कटोच ने न्यायालय में मुख्य गवाह और शिकायकर्ता के झूठ को सिद्ध कर दिया। सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि अगर शिकायतकर्ता ने आरोपी पटवारी को दो हजार रुपये रिश्वत नहीं दी थी तो उसने सरकारी धन की रिंबरसमेंट क्यों ली। इसको सही मानते हुए न्यायालय ने जहां आरोपी पटवारी को दो साल की जेल और 20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने के आदेश जारी किए वहीं गवाह और शिकायतकर्ता के खिलाफ न्यायालय में झूठ बोलने पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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