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बरोट में शानन प्रोजेक्ट के रिजरवायर से सिल्ट वाला पानी छोड़ने पर कार्रवाई
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बरोट (मंडी)। शानन परियोजना के रिजरवायर से अवैज्ञानिक ढंग से सिल्ट वाला पानी सीधे ऊहल नदी में छोड़ने के मामले में प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामले में चेयरमैन/मैनेजिंग डायरेक्टर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को वाटर एक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें पंद्रह दिन के भीतर पानी बंद करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही रिजरवायर में जमा सिल्ट को वैज्ञानिक ढंग से निकालने, नदी नालों के जीव जंतुओं के जीने के लिए पर्याप्त पानी छोड़ने और नदी में पानी की गुुणवत्ता को सुधारने के लिए भी कहा है। अन्यथा वाटर एक्ट 1974 के तहत 10 हजार तक जुर्माने, छह माह तक कैद और परियोजना की बिजली काटने की प्रक्रिया शुरू करने की चेतावनी दी है। शानन परियोजना पंजाब विद्युत बोर्ड के अधीन है।
अमर उजाला ने पांच दिसंबर को प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
ग्रामीणों और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों ने शानन परियोजना से अवैज्ञानिक ढंग से सिल्ट सीधे ऊहल में फेंकने का मुद्दा अमर उजाला के माध्यम से पांच दिसंबर को जोर शोर से उठाया था। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, जिला प्रशासन को वीडियो और फोटो सहित की थी। इसके बाद 26 से लेकर 29 दिसंबर तक अधिकारियों की संयुक्त विजिट में भी शानन से मानकों के तहत पंद्रह फीसदी साफ पानी नदी नालों में छोड़ने के निर्देश दिए थे। अब सदस्य सचिव डॉ. आरके पुर्थी ने वाटर एक्ट के तहत तीन जनवरी को नोटिस जारी किया है।
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मतस्य विभाग ने भी की थी शिकायत
सिल्ट वाला खतरनाक पानी छोड़ने की शिकायत असिस्टेंट डॉयरेक्टर फिशरीज मंडी ने भी की थी। इसमें कहा गया था कि एनजीटी के तय मानकों के तहत शानन से पंद्रह फीसदी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। मछलियों के प्रजनन का समय चल रहा है। प्रजनन सीजन प्रभावित होने से सैकड़ों मछुआरों की आर्थिकी भी संकट में है।
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मत्स्य से जुड़े रोजगार को भी संकट
सैन मोहल्ला के नरेंद्र सैणी ने प्रशासन और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को सौंपी शिकायत में कहा था कि शानन परियोजना से अवैज्ञानिक ढंग से खतरनाक सिल्ट का पानी छोड़ा जा रहा है। इससे हजारों जीव जंतुओं पर संकट पैदा हो गया है।
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अमर उजाला ने पांच दिसंबर को प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
ग्रामीणों और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों ने शानन परियोजना से अवैज्ञानिक ढंग से सिल्ट सीधे ऊहल में फेंकने का मुद्दा अमर उजाला के माध्यम से पांच दिसंबर को जोर शोर से उठाया था। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, जिला प्रशासन को वीडियो और फोटो सहित की थी। इसके बाद 26 से लेकर 29 दिसंबर तक अधिकारियों की संयुक्त विजिट में भी शानन से मानकों के तहत पंद्रह फीसदी साफ पानी नदी नालों में छोड़ने के निर्देश दिए थे। अब सदस्य सचिव डॉ. आरके पुर्थी ने वाटर एक्ट के तहत तीन जनवरी को नोटिस जारी किया है।
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मतस्य विभाग ने भी की थी शिकायत
सिल्ट वाला खतरनाक पानी छोड़ने की शिकायत असिस्टेंट डॉयरेक्टर फिशरीज मंडी ने भी की थी। इसमें कहा गया था कि एनजीटी के तय मानकों के तहत शानन से पंद्रह फीसदी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। मछलियों के प्रजनन का समय चल रहा है। प्रजनन सीजन प्रभावित होने से सैकड़ों मछुआरों की आर्थिकी भी संकट में है।
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मत्स्य से जुड़े रोजगार को भी संकट
सैन मोहल्ला के नरेंद्र सैणी ने प्रशासन और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को सौंपी शिकायत में कहा था कि शानन परियोजना से अवैज्ञानिक ढंग से खतरनाक सिल्ट का पानी छोड़ा जा रहा है। इससे हजारों जीव जंतुओं पर संकट पैदा हो गया है।