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सरकार बदले की भावना से कंडक्टर भर्ती को विवादों में न लटकाए
Updated Wed, 31 Jan 2018 11:01 PM IST
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टिहरा (मंडी)। कंडक्टर भर्ती के लटकने से रोजगार की आस लगाए बैठे युवा हतोत्साहित हैं। परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों ने जयराम सरकार से बदले की भावना को त्याग कर कंडक्टर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है। अन्यथा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
कंडक्टर परीक्षा में पास हुए परीक्षार्थियों में रवि सिंह, भूप चंद, अमीन चंद, सोनू, पूर्ण चंद, तरुण शर्मा और डिंपल ठाकुर का कहना है कि सरकार ने जानबूझ कर बदले की भावना से इस भर्ती के परिणाम पर रोक लगा रखी है और वह इसे रद्द करने की तैयारी में है। सरकार का अब यह कहना कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं पर अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं है तो इसमें परीक्षार्थियों की क्या गलती है। प्रदेश सरकार बाहरी मन से साबित करने की कोशिश कर रही है कि वह इस भर्ती को बदले की भावना से नहीं देखती है। अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि सरकार परिणाम जल्द घोषित करे अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें मजबूर होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। क्योंकि कड़ी मेहनत व अन्य खर्चा करके उन्होंने सरकार के नियमों के तहत ही परीक्षा पास की हुई है और बेरोजगारी के दौर में यह आस लगाए हुए हैं कि उनका कंडक्टर भर्ती परीक्षा परिणाम कब निकलेगा।
हिमाचल पथ परिवहन निगम ने अक्तूूबर 2017 में कंडक्टर भर्ती के 1300 पद भरने के लिए परीक्षा ली थी। जिसमें 3616 अभ्यर्थी पास हुए थे और इन परीक्षार्थियों के दस्तावेजों का पुनर्मूल्यांकन भी हो गया था। सरकार ने नतीजा निकालने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन आचार संहिता लग जाने के कारण परिणाम नहीं निकल पाया था। सत्ता बदलते ही अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर अब संकट के बादल छा गए हैं।
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कंडक्टर परीक्षा में पास हुए परीक्षार्थियों में रवि सिंह, भूप चंद, अमीन चंद, सोनू, पूर्ण चंद, तरुण शर्मा और डिंपल ठाकुर का कहना है कि सरकार ने जानबूझ कर बदले की भावना से इस भर्ती के परिणाम पर रोक लगा रखी है और वह इसे रद्द करने की तैयारी में है। सरकार का अब यह कहना कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं पर अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं है तो इसमें परीक्षार्थियों की क्या गलती है। प्रदेश सरकार बाहरी मन से साबित करने की कोशिश कर रही है कि वह इस भर्ती को बदले की भावना से नहीं देखती है। अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि सरकार परिणाम जल्द घोषित करे अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें मजबूर होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। क्योंकि कड़ी मेहनत व अन्य खर्चा करके उन्होंने सरकार के नियमों के तहत ही परीक्षा पास की हुई है और बेरोजगारी के दौर में यह आस लगाए हुए हैं कि उनका कंडक्टर भर्ती परीक्षा परिणाम कब निकलेगा।
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हिमाचल पथ परिवहन निगम ने अक्तूूबर 2017 में कंडक्टर भर्ती के 1300 पद भरने के लिए परीक्षा ली थी। जिसमें 3616 अभ्यर्थी पास हुए थे और इन परीक्षार्थियों के दस्तावेजों का पुनर्मूल्यांकन भी हो गया था। सरकार ने नतीजा निकालने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन आचार संहिता लग जाने के कारण परिणाम नहीं निकल पाया था। सत्ता बदलते ही अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर अब संकट के बादल छा गए हैं।
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