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Mandi News: आठ साल में नहीं सुधरी 800 मीटर सड़क, अब कंधों पर उठाकर लाने पड़ रहे मरीज
Mon, 23 Sep 2024 10:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 23 Sep 2024 10:17 AM IST
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लडभड़ोल क्षेत्र की ग्राम पंचायत खद्दर के चकराहण गांव से बीमार बुजुर्ग महिला को फट्टों में उठाकर
लडभड़ोल (मंडी)। लडभड़ोल क्षेत्र की पंचायत खद्दर के चकराहण गांव तक जाने वाली 800 मीटर लंबी सड़क का हाल आठ साल से जस का तस है। सड़क तो है, पर ऐसी कि इसे सड़क कहने में भी हिचक होती है। मानो सरकारी नीतियों का मकसद ही हो कि ग्रामीण खुद ही अपनी दुर्दशा को सहे और सरकार को धन्यवाद देते रहें कि ‘कम से कम सड़क का नाम तो है’।
इस हालात का जीता-जागता उदाहरण तब सामने आया जब 60 वर्षीय विमला देवी को घर में गिरने से चोट लग गई, लेकिन चकराहण गांव तक एंबुलेंस पहुंचना तो दूर, कोई सामान्य गाड़ी भी न आ सकी। अब जरा सोचिए, 21वीं सदी की तकनीकी क्रांति के युग में भी विमला देवी को लकड़ी के फट्टों पर रखकर कंधों पर उठाना पड़ा। ग्रामीणों के जुगाड़ और साहस को सलाम, लेकिन सवाल यह है कि सरकार कब जागेगी?
चिड़ी देवी, व्यासा देवी, मीरा देवी, मिंटू राम, संजीव कुमार, वेद प्रकाश, बुधी सिंह और ईश्वर दास आदि ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बने आठ साल हो चुके हैं, लेकिन इसकी मरम्मत को लेकर किसी ने इधर देखा तक नहीं। हर बरसात में यह सड़क नई मुसीबत लेकर आती है। उन्होंने कहा कि बीते साल लोगों ने आपस में पैसे इकट्ठे करके सड़क को खुद ही ठीक किया था। अब तो ऐसे लगता है जैसे सरकार ने सड़क बनाकर कह दिया हो, ‘अब तुम देख लो आगे का।’
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उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता पवन गुलेरिया ने कहा कि, ‘सड़क को दुरुस्त करने के लिए जेसीबी मशीन भेज दी गई है। जल्द ही सब ठीक हो जाएगा।’ अब सवाल यह है कि ‘जल्द’ का सरकारी कैलेंडर में क्या मतलब होता है? आखिर कब तक ग्रामीणों को चादर के झूले में बीमारों को लादकर अस्पताल तक ले जाना पड़ेगा?
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इस हालात का जीता-जागता उदाहरण तब सामने आया जब 60 वर्षीय विमला देवी को घर में गिरने से चोट लग गई, लेकिन चकराहण गांव तक एंबुलेंस पहुंचना तो दूर, कोई सामान्य गाड़ी भी न आ सकी। अब जरा सोचिए, 21वीं सदी की तकनीकी क्रांति के युग में भी विमला देवी को लकड़ी के फट्टों पर रखकर कंधों पर उठाना पड़ा। ग्रामीणों के जुगाड़ और साहस को सलाम, लेकिन सवाल यह है कि सरकार कब जागेगी?
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चिड़ी देवी, व्यासा देवी, मीरा देवी, मिंटू राम, संजीव कुमार, वेद प्रकाश, बुधी सिंह और ईश्वर दास आदि ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बने आठ साल हो चुके हैं, लेकिन इसकी मरम्मत को लेकर किसी ने इधर देखा तक नहीं। हर बरसात में यह सड़क नई मुसीबत लेकर आती है। उन्होंने कहा कि बीते साल लोगों ने आपस में पैसे इकट्ठे करके सड़क को खुद ही ठीक किया था। अब तो ऐसे लगता है जैसे सरकार ने सड़क बनाकर कह दिया हो, ‘अब तुम देख लो आगे का।’
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उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता पवन गुलेरिया ने कहा कि, ‘सड़क को दुरुस्त करने के लिए जेसीबी मशीन भेज दी गई है। जल्द ही सब ठीक हो जाएगा।’ अब सवाल यह है कि ‘जल्द’ का सरकारी कैलेंडर में क्या मतलब होता है? आखिर कब तक ग्रामीणों को चादर के झूले में बीमारों को लादकर अस्पताल तक ले जाना पड़ेगा?