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Mandi News: डोल और गदयाड़ा गांवों में 65 बीघा उपजाऊ भूमि ब्यास नदी में समाई
Fri, 12 Sep 2025 06:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 12 Sep 2025 06:50 PM IST
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खडिहार पंचायत के डोल में ब्यास नदी के बहाव से खराब हुए खेत। स्रोत जागरूक पाठक
लडभड़ोल (मंडी)। मकरीड़ी उपतहसील की पंचायत खडिहार के गांव डोल और गदयाड़ा में ब्यास नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आए पानी के कारण ब्यास नदी उफान पर है। जिसके चलते 65 बीघा से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह से नष्ट हो गई है। नदी का पानी अब डोल और गदयाड़ा गांवों की ओर बढ़ रहा है जिससे ये दोनों गांव खतरे की जद में आ गए हैं।
बाढ़ ने स्थानीय किसानों की कमर तोड़ दी है। यह भूमि उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा थी। प्रभावित किसानों में प्रवीण बिष्ट, नागेश, गोविंद, प्रभात, मेघ सिंह, सोहन सिंह और चेत राम ने बताया कि मूसलाधार बारिश के कारण ब्यास नदी ने अपना रुख उनके खेतों की ओर कर लिया और देखते ही देखते उनकी 65 बीघा जमीन नदी में समा गई। किसानों ने इस तबाही के लिए सीधे तौर पर विभाग और ठेकेदारों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
उनका कहना है कि यदि विभाग चाहता तो पीने के पानी की स्कीम और उनकी कीमती जमीन को बचाया जा सकता था। उन्होंने बताया कि साल 2022 में आई भयंकर बाढ़ के बाद सुरक्षा कार्य के लिए 5.64 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू हुई थी। अन्य जगह पर ठेकेदारों ने अपना काम पूरा भी किया लेकिन इस संवेदनशील स्थान पर किसी ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। किसानों के अनुसार अब 12 करोड़ रुपये के नए टेंडर लगाए गए हैं। उन्होंने मांग की है कि विभाग, ठेकेदार और स्थानीय जनता मिलकर बची हुई भूमि को बचाने का प्रयास करें। किसानों ने प्रदेश सरकार से तत्काल प्रभाव से यहां एक सुरक्षा दीवार बनाने की गुहार लगाई है।
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जल शक्ति विभाग उपमंडल लडभड़ोल के कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार ने बताया कि विभाग ने सुरक्षा कार्य का ठेका अवार्ड कर दिया है। इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, मकरीड़ी के नायब तहसीलदार विनय कुमार ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है।
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बाढ़ ने स्थानीय किसानों की कमर तोड़ दी है। यह भूमि उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा थी। प्रभावित किसानों में प्रवीण बिष्ट, नागेश, गोविंद, प्रभात, मेघ सिंह, सोहन सिंह और चेत राम ने बताया कि मूसलाधार बारिश के कारण ब्यास नदी ने अपना रुख उनके खेतों की ओर कर लिया और देखते ही देखते उनकी 65 बीघा जमीन नदी में समा गई। किसानों ने इस तबाही के लिए सीधे तौर पर विभाग और ठेकेदारों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
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उनका कहना है कि यदि विभाग चाहता तो पीने के पानी की स्कीम और उनकी कीमती जमीन को बचाया जा सकता था। उन्होंने बताया कि साल 2022 में आई भयंकर बाढ़ के बाद सुरक्षा कार्य के लिए 5.64 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू हुई थी। अन्य जगह पर ठेकेदारों ने अपना काम पूरा भी किया लेकिन इस संवेदनशील स्थान पर किसी ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। किसानों के अनुसार अब 12 करोड़ रुपये के नए टेंडर लगाए गए हैं। उन्होंने मांग की है कि विभाग, ठेकेदार और स्थानीय जनता मिलकर बची हुई भूमि को बचाने का प्रयास करें। किसानों ने प्रदेश सरकार से तत्काल प्रभाव से यहां एक सुरक्षा दीवार बनाने की गुहार लगाई है।
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जल शक्ति विभाग उपमंडल लडभड़ोल के कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार ने बताया कि विभाग ने सुरक्षा कार्य का ठेका अवार्ड कर दिया है। इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, मकरीड़ी के नायब तहसीलदार विनय कुमार ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है।