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मंडी में टीबी के 126 नए रोगी
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मंडी। सीएम के गृहक्षेत्र मंडी में सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद टीबी रोग पर अंकुश नहीं लग सका है। हिमाचल को टीबी मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत मंडी जिले में पखवाड़े के दौरान 126 टीबी के नए मामले सामने आए हैं। 371 मरीजों का डाटा निजी अस्पतालों से आया है। अधिकांश को टीबी की दवाइयां आरंभ की गई है। पहली से 15 जनवरी तक यह पखवाड़ा मनाया गया। इस जानकारी का खुलासा जिला स्तरीय क्षय रोग निवारण समिति की बैठक में हुआ है। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने की। उन्होंने बताया कि पखवाड़ा अभियान हर तीन माह बाद चलाया जाएगा ताकि 2021 तक जिला को टीबी मुक्त किया जा सके। अतिरिक्त उपायुक्त ने मंडी चिकित्सालय में डीआरटीबी केंद्र को शीघ्र कार्यान्वयन करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी जीवानंद चौहान, जिला क्षय रोग अधिकारी अरिवंदो राय, डॉ. रविंद्र, डॉ. केएस मल्होत्रा शामिल रहे।
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500 रुपये प्रतिमाह मरीजों को पोषण के लिए होता है आवंटित
बैठक में बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से टीबी की रोकथाम के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। जागरूकता अभियान भी स्वास्थ्य विभाग छेड़े हुए हैं। यही नहीं क्षय पोषण योजना के अंतर्गत 45 लाख रुपये की राशि व्यय हो रही है। इसमें 500 रुपये प्रतिमाह मरीजों को पोषण के लिए आवंटित किए जा रहे हैं।
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निजी संस्थान जानकारी नहीं दें तो दर्ज हो सकता है मुकदमा
यदि निजी अस्पताल या चिकित्सालय के पास कोई टीबी का मामला आता है और वह स्वास्थ्य विभाग को सूचित नहीं करते हैं तो संचालकों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। निजी अस्पतालों को जानकारी देनी होगी।
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टीबी दवा के विक्रेता को भी भेजना पड़ता है रिकार्ड
टीबी दवा के विक्रेताओं को भी सारा रिकार्ड रखना पड़ता है। उन्हें भी यह रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजनी होती है अन्यथा उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मंडी में निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने टीबी के 371 मरीजों का डाटा उपलब्ध करवाया है।
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500 रुपये प्रतिमाह मरीजों को पोषण के लिए होता है आवंटित
बैठक में बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से टीबी की रोकथाम के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। जागरूकता अभियान भी स्वास्थ्य विभाग छेड़े हुए हैं। यही नहीं क्षय पोषण योजना के अंतर्गत 45 लाख रुपये की राशि व्यय हो रही है। इसमें 500 रुपये प्रतिमाह मरीजों को पोषण के लिए आवंटित किए जा रहे हैं।
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निजी संस्थान जानकारी नहीं दें तो दर्ज हो सकता है मुकदमा
यदि निजी अस्पताल या चिकित्सालय के पास कोई टीबी का मामला आता है और वह स्वास्थ्य विभाग को सूचित नहीं करते हैं तो संचालकों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। निजी अस्पतालों को जानकारी देनी होगी।
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टीबी दवा के विक्रेता को भी भेजना पड़ता है रिकार्ड
टीबी दवा के विक्रेताओं को भी सारा रिकार्ड रखना पड़ता है। उन्हें भी यह रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजनी होती है अन्यथा उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मंडी में निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने टीबी के 371 मरीजों का डाटा उपलब्ध करवाया है।
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