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धर्मपुर अस्पताल में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
Updated Sat, 21 Apr 2018 11:04 PM IST
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धर्मपुर (मंडी)। उपमंडल में स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे हैं। कहीं चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं तो कहीं स्टाफ का टोटा है। नतीजतन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। लोगों को आपात स्थिति में टांडा का रुख करना पड़ रहा है। मेडिकल ब्लॉक धर्मपुर में आठ डॉक्टर के पद तो वहीं तीन स्टाफ नर्स के पद खाली हैं। इसके साथ ही मेडिकल ब्लॉक संधोल में 33 सब सेंटर है। इनमें एक-एक महिला और पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता होने चाहिए लेकिन इनमें भी करीब 21 पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और छह महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पद खाली पड़े हैं।
धर्मपुर अस्पताल करीब 30 पंचायतों के लोगों का किसी भी आपात स्थिति में एकमात्र सहारा है प्रदेश में सरकार बदलते ही हर बार अस्पताल को लेकर नई नई घोषणाएं की जाती रही हैं लेकिन धरातल में कोई भी घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई है। 1999 में प्रदेश सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने पीएचसी धर्मपुर को 30 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने की घोषणा की थी लेकिन आज भी करीब 19 वर्ष बीत जाने के बावजूद मात्र छह बिस्तर ही अस्पताल में हैं। पूर्व प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जब धर्मपुर अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने अस्पताल में आधुनिक शव गृह बनाने की घोषणा की और पूर्व मुख्यमंत्री ने धर्मपुर के अस्पताल को स्तरोन्नत कर सिविल अस्पताल बनाने की घोषणा की। इस अस्पताल में डॉक्टर के दो पद खाली चल रहे हैं। इसके साथ ही दंत चिकित्सक, एक स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन का पद भी खाली चल रहा है। आपातकालीन स्थिति में लोगों को मंडी या फिर टांडा का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, सीएचसी संधोल में भी डॉक्टर का एक पद खाली है तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य शिक्षक, महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, रेडियोग्राफर, स्टाफ नर्स का भी एक-एक पद खाली है। इसके बारे में जब बीएमओ संधोल डॉक्टर रमेश डोगरा से बात की तो उन्होंने कहा कि इसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
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धर्मपुर अस्पताल करीब 30 पंचायतों के लोगों का किसी भी आपात स्थिति में एकमात्र सहारा है प्रदेश में सरकार बदलते ही हर बार अस्पताल को लेकर नई नई घोषणाएं की जाती रही हैं लेकिन धरातल में कोई भी घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई है। 1999 में प्रदेश सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने पीएचसी धर्मपुर को 30 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने की घोषणा की थी लेकिन आज भी करीब 19 वर्ष बीत जाने के बावजूद मात्र छह बिस्तर ही अस्पताल में हैं। पूर्व प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जब धर्मपुर अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने अस्पताल में आधुनिक शव गृह बनाने की घोषणा की और पूर्व मुख्यमंत्री ने धर्मपुर के अस्पताल को स्तरोन्नत कर सिविल अस्पताल बनाने की घोषणा की। इस अस्पताल में डॉक्टर के दो पद खाली चल रहे हैं। इसके साथ ही दंत चिकित्सक, एक स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन का पद भी खाली चल रहा है। आपातकालीन स्थिति में लोगों को मंडी या फिर टांडा का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, सीएचसी संधोल में भी डॉक्टर का एक पद खाली है तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य शिक्षक, महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, रेडियोग्राफर, स्टाफ नर्स का भी एक-एक पद खाली है। इसके बारे में जब बीएमओ संधोल डॉक्टर रमेश डोगरा से बात की तो उन्होंने कहा कि इसके बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
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