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चैंक बाउंस के आरोपी को एक साल का कारावास
Updated Sat, 21 Apr 2018 11:04 PM IST
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Rohtak Court
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अमर उजाला ब्यूरो
सुंदरनगर (मंडी)। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर-एक सुंदरनगर हितेंद्र शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस का मामला सिद्ध होने पर दोषी को एक वर्ष का कारावास और हर्जाना देने का फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता लक्ष्मण सिंह निवासी महादेव सुंदरनगर ने अधिवक्ता जितेंद्र ठाकुर और कीर्ति ठाकुर के माध्यम से आरोपी मेहर चंद पुत्र ज्यूणू राम निवासी नालग तहसील सुंदरनगर जिला मंडी के खिलाफ चेक बाउंस होने पर अदालत में मुकद्दमा दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता कीर्ति ठाकुर ने बताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से आठ लाख रुपये उधार लिए थे। इसके बदले में आरोपी ने शिकायतकर्ता को चेक दिया था। जब लक्ष्मण सिंह ने बैंक में चेक वसूली को लगाया तो वह खाते में पैसे न होने की वजह से बाउंस हो गया। इसके बाद कई बार शिकायतकर्ता ने आरोपी मेहर चंद से अपनी राशि वापस मांगी लेकिन उसने बार-बार समय देने पर भी अदा नहीं की। इस पर लक्ष्मण सिंह ने अदालत में चेक बाउंस का केस दर्ज करवाया था। इस पर दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने चेक बाउंस के दोषी को एक वर्ष का साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को आठ लाख 80 हजार रुपये हर्जाना देने की सजा सुनाई।
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सुंदरनगर (मंडी)। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर-एक सुंदरनगर हितेंद्र शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस का मामला सिद्ध होने पर दोषी को एक वर्ष का कारावास और हर्जाना देने का फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता लक्ष्मण सिंह निवासी महादेव सुंदरनगर ने अधिवक्ता जितेंद्र ठाकुर और कीर्ति ठाकुर के माध्यम से आरोपी मेहर चंद पुत्र ज्यूणू राम निवासी नालग तहसील सुंदरनगर जिला मंडी के खिलाफ चेक बाउंस होने पर अदालत में मुकद्दमा दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता कीर्ति ठाकुर ने बताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से आठ लाख रुपये उधार लिए थे। इसके बदले में आरोपी ने शिकायतकर्ता को चेक दिया था। जब लक्ष्मण सिंह ने बैंक में चेक वसूली को लगाया तो वह खाते में पैसे न होने की वजह से बाउंस हो गया। इसके बाद कई बार शिकायतकर्ता ने आरोपी मेहर चंद से अपनी राशि वापस मांगी लेकिन उसने बार-बार समय देने पर भी अदा नहीं की। इस पर लक्ष्मण सिंह ने अदालत में चेक बाउंस का केस दर्ज करवाया था। इस पर दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने चेक बाउंस के दोषी को एक वर्ष का साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को आठ लाख 80 हजार रुपये हर्जाना देने की सजा सुनाई।