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टारना की सीढ़ियों पर नवरात्रों में सजाया जाएगा मेला: इंटेक
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मंडी। मंडी की विलुप्त हो रही सांस्कृतिक विरासत, परंपरा, बोली और लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में भारतीय सांस्कृतिक निधि मंडी चैप्टर प्रयासरत है। यह बात रविवार को इंटेक की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए संयोजक नरेश वैद्य और सह संयोजक अनिल शर्मा ने कही। बैठक में निर्णय लिया गया कि मंडी के टारना की सीढ़ियों पर शारदीय नवरात्रों के दौरान आयोजित होने वाले प्राचीन मेलों को इंटेक दोबारा शुरू करेगी। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू की जाएंगी। इंटेक के प्रवक्ता केके शर्मा ने बताया कि इंटेक की ओर से मंडी में प्राचीन ब्यास आरती को दोबारा शुरू किया गया। इसका असर अब कुल्लू में भी ब्यास आरती के रूप में देखा गया। उन्होंने इस दौरान इंटेक की बीते साल की गतिविधियों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। भारतीय सांस्कृतिक निधि मंडी चैप्टर के संयोजक नरेश मल्होत्रा ने बताया कि कांगड़ा कलम की तर्ज पर मंडी कलम भी है, जो विलुप्त होने की कगार पर थी। इसका नई पीढ़ी से साक्षात्कार करवाने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन चित्रकार अमन की देखरेख में किया। बच्चों में संस्कार विकसित करने के लिए वर्ष 2015 से 2019 के बीच 18 कार्यक्रम मंडी शहर के आसपास के स्कूलों में आयोजित किए गए। इस दौरान चित्रकला और क्विज आदि का आयोजन किया गया। इस अवसर पर इंटेक मंडी चैप्टर के करीब 35 पदाधिकारियों ने भाग लिया। इनमें चित्रकार अच्छरू राम गौतम, हेमलता पुरी, महेश पुरी, वनिता मल्होत्रा, निशी, ज्योत्सना, हितेश वैद्य, संतोष मेहता, निशा टंडन, हेमंत शर्मा, मृदुला, वाईसी वैद्य, पवन मल्होत्रा, सुरेश गोयल और अजय सहगल शामिल रहे।
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