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मेडिपर्सन एक्ट में संशोधन का किया विरोध
Updated Mon, 10 Dec 2018 11:00 PM IST
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मंडी। हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन जिला मंडी इकाई ने प्रदेश सरकार द्वारा मेडिपर्सन एक्ट में प्रस्तावित संशोधन का कड़े शब्दों में विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र, महासचिव विशाल जंवाल, प्रेस सचिव दीपक गुप्ता ने बताया कि यदि इस एक्ट को गैर जमानती अपराधों की श्रेणी से हटाया जाता है तो चिकित्सकों एवं स्टाफ के खिलाफ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं एवं असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देना होगा। डाक्टरों एवं स्टाफ के संगठन निरंतर सरकार से यह आग्रह करते आए हैं कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए, ऐसे में मौजूदा कानून को कमजोर करना चिकित्सकों और स्टाफ की मांगों और हितों के साथ खिलवाड़ है। एसोसिएशन ने आग्रह किया है कि मेडिपर्सन एक्ट को गैर जमानती ही रखा जाए, ताकि सभी स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी निडर होकर मरीजों के हित में अपनी सेवाएं बेहतरीन रूप से दे सके। उन्होंने कहा अगर ऐसा नहीं हुआ तो संगठन को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चिकित्सक सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं लेकिन सभी जेनेरिक दवाइयां सरकारी संस्थानों में उपलब्ध ही नहीं हैं। बहुत सी दवाएं जेनेरिक न होकर एथिकल भी हैं। जिसका ज्ञान उच्च अधिकारियों को नहीं है। सरकारी संस्थानों में सप्लाई की जा रही जेनेरिक दवाइयों के सैंपल फेल होने की रिपोर्ट आए दिन आ रही है जो कि इन जेनेरिक दवाइयों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान है। एसोसिएशन लंबे समय से मांग रही है कि जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता की जांच किए बिना उनको उपलब्ध करवाना मरीजों के लिए हानिकारक एवं जानलेवा भी हो सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि सभी जेनेरिक दवाइयां की गुणवत्ता एवं निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करवाई जाए ताकि मरीजों को इसका अधिक से अधिक लाभ मिल सके।
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