चैलचौक (मंडी)। मौसम शुष्क होने पर सेब बगीचों में वूली एफिड कीट ने हमला बोल दिया है। कमरूघाटी के सेब बगीचों में वूली एफिड कीट का प्रकोप बढ़ने से बागवान परेशान हो उठे हैं। सफेद गुच्छेदार आकार बनाकर यह कीट पौधों की टहनियों पर साफ दिखाई दे रहा है। वूली एफिड कीट सेब पौधों के स्परों को नष्ट कर रहा है। जिससे आगामी फसल पर विपरीत असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। यह कीट हवा के साथ एक बगीचे से दूसरे बगीचे तक पहुंच रहा है। जिससे अनेक बगीचे इसकी चपेट में आ गए हैं। मौसम शुष्क होने से वूली एफिड कीट तने से टहनियों पर आ गया है और बीमों को खराब करने में लग गया है। कमरूघाटी के सरोआ, खनैबरू, बांदली, कुटाहची, बाढू, घीडी, रोहांडा, शकोहर, थमाडी, चौकी, पंडार और जंजैहली घाटी के अनेक बगीचे वूली एफिड कीट के हमले की चपेट में आ गए हैं। बागवानों में प्रकाश चंद ठाकुर, महेंद्र कुमार, चंद्रमणी, यशवंत सिंह, दीनानाथ, सीतू राम, लेखराज, डोलेराम, शेर सिंह और ठाकर दास ने बताया कि सेब बगीचों में शुष्क मौसम के चलते वूली एफिड कीट का प्रकोप बढ़ गया है। बागवानों ने बताया कि हर साल वूली एफिड कीट के हमले से बागवान परेशान हैं। जिससे यह कीट सेब पौधों को खासा नुकसान पहुंचा रहा है। बागवानी विभाग को भी क्षेत्र के सेब बगीचों में फैल रहे वूली एफिड कीट के प्रकोप की शिकायतें मिल रही हैं। बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज ने बताया कि शुष्क मौसम में वूली एफिड कीट तने से टहनियों में आ जाता है तथा सेब पौधों का रस चूसता है। जिससे पौधों के खराब होने का भय रहता है। उन्होंने बताया कि ठंड पडने पर यह कीट टहनियों से तने में चला जाता है। जिससे पूर्व बागवान डरमट और मासवान प्रति दो एमएल प्रति लीटर पानी में डालकर इसका छिड़काव करे। उद्यान विकास अधिकारी गोहर चिंतराम ठाकुर ने बताया कि उद्यान प्रसार केंद्रों में दवाइयां उपलब्ध हैं। बागवान नजदीकी उद्यान प्रसार केंद्रों से दवाएं प्राप्त कर सकते हैं।