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Mandi News: बालीचौकी अस्पताल में रोजाना पहुंचे रहे 200 मरीज
Tue, 13 Jan 2026 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Tue, 13 Jan 2026 11:24 PM IST
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जोगिंद्रनर अस्पताल में उपचार लेने के लिए पहुंचे मरीज। स्रोत जागरूक पाठक
बालीचौकी (मंडी)। सराज घाटी में पिछले करीब छह माह से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इस लंबे ''ड्राइ स्पैल'' के बीच शुष्क ठंड और धूल-मिट्टी ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है।
आलम यह है कि क्षेत्र के लोग सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बालीचौकी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे गिर चुका है। कोहरे और बर्फीली हवाओं के बीच दैनिक कार्यों के लिए बाहर निकलने वाले लोग बीमार पड़ रहे हैं।
सबसे बुरा असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है, जिनमें छाती जाम होना और निमोनिया जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मंडी और नेरचौक रेफर किया जा रहा है।
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लंबे सूखे के कारण खेतों की नमी गायब हो चुकी है और जमीन में दरारें पड़ गई हैं। कच्ची सड़कों और रास्तों पर उड़ने वाली धूल-मिट्टी सांस के मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है।
अस्पताल में रोजाना 150 से 200 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इनमें अधिकांश सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। बचाव के लिए लोग धूल-मिट्टी से दूर रहें और शुष्क ठंड में विशेष सावधानी बरतें। -डॉ. सतीश शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बालीचौकी
लंबे समय से बारिश न होने से सड़कों पर धूल का गुबार रहता है। शुष्क सर्दी और इस प्रदूषण की वजह से हर घर में कोई न कोई बीमार है।- -जोगिंद्र कुमार, बालीचौकी
खेत पूरी तरह सूख चुके हैं। अब केवल बारिश और बर्फबारी ही इस शुष्क ठंड से राहत दिला सकती है, ताकि वातावरण साफ हो और फसलों को जीवन मिले। -गंगावती भारद्वाज, बालीचौकी
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आलम यह है कि क्षेत्र के लोग सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बालीचौकी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे गिर चुका है। कोहरे और बर्फीली हवाओं के बीच दैनिक कार्यों के लिए बाहर निकलने वाले लोग बीमार पड़ रहे हैं।
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सबसे बुरा असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है, जिनमें छाती जाम होना और निमोनिया जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मंडी और नेरचौक रेफर किया जा रहा है।
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लंबे सूखे के कारण खेतों की नमी गायब हो चुकी है और जमीन में दरारें पड़ गई हैं। कच्ची सड़कों और रास्तों पर उड़ने वाली धूल-मिट्टी सांस के मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है।
अस्पताल में रोजाना 150 से 200 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इनमें अधिकांश सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। बचाव के लिए लोग धूल-मिट्टी से दूर रहें और शुष्क ठंड में विशेष सावधानी बरतें। -डॉ. सतीश शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बालीचौकी
लंबे समय से बारिश न होने से सड़कों पर धूल का गुबार रहता है। शुष्क सर्दी और इस प्रदूषण की वजह से हर घर में कोई न कोई बीमार है।- -जोगिंद्र कुमार, बालीचौकी
खेत पूरी तरह सूख चुके हैं। अब केवल बारिश और बर्फबारी ही इस शुष्क ठंड से राहत दिला सकती है, ताकि वातावरण साफ हो और फसलों को जीवन मिले। -गंगावती भारद्वाज, बालीचौकी