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धंसने लगा कोलंग गांव, डंगा ढहा चार मंजिला मकान को खतरा
Updated Thu, 24 Aug 2017 11:04 PM IST
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल जोगिंद्रनगर की कोंलग पंचायत के भरगाईं-सहरूण गांव में मकान का डंगा ढहने से चार मंजिला मकान समेत 30 मकानों को खतरा पैदा हो गया है। यह मकान तीन भाइयों श्रवण कुमार, राजमल और प्रकाश का है। इस गांव में लंबे अरसे जमीन लगातार धंस रही है। जिससे 30 के करीब मकानों को खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन को इसकी सूचना पंचायत प्रतिनिधियों ने दी है। लेकिन, कोई कार्रवाई प्रशासन नहीं कर रहा है। जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रभावितों ने कहा कि गत दिन हुई भारी बारिश से मकान के आगे लग डंगा ढह गया है। जिससे उनके मकान के गिरने का भी खतरा पैदा हो गया है। तीनों भाइयों ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि तत्काल रूप से राहत प्रदान की जाए। गांव के लोगों का कहना है कि समस्या एक परिवार की नहीं है। इस गांव में कई घरों को जमीन धंसने से खतरा पैदा हो गया है। लोगों का आरोप है कि वह कई बार इस समस्या के समाधान के लिए सरकार से मकान बनाने के लिए जमीन देने के संदर्भ में आग्रह कर चुके हैं। लेकिन, सरकार को शायद कोटरोपी जैसे हादसे का इंतजार है। पंचायत के प्रधान देसराज ने कहा कि पूरा गांव दहशत में जीने को मजबूर है। जमीन के धंसने से कोई भी बड़ा हादसा कभी भी पेश आ सकता है। इससे पहले भी इस गांव में प्राकृतिक आपदाएं आ चुकी हैं। गत तीन चार साल पहले भी लोगों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। यह सारा गांव धंस रहा है। गांव में करीब 30 से 32 परिवार रहते हैं। सरकार को कई बार इस समस्या से अवगत करवाया जा चुका है। पंचायत का आग्रह है कि गांव के ऊपर और नीचे सरकारी भूमि पड़ी है। पंचायत के लोग सरकार से मांग करते रहे हैं कि उनकी जमीन लेकर उन्हें यह सरकारी भूमि अलाट की दी जाए।
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प्रभावितों ने कहा कि गत दिन हुई भारी बारिश से मकान के आगे लग डंगा ढह गया है। जिससे उनके मकान के गिरने का भी खतरा पैदा हो गया है। तीनों भाइयों ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि तत्काल रूप से राहत प्रदान की जाए। गांव के लोगों का कहना है कि समस्या एक परिवार की नहीं है। इस गांव में कई घरों को जमीन धंसने से खतरा पैदा हो गया है। लोगों का आरोप है कि वह कई बार इस समस्या के समाधान के लिए सरकार से मकान बनाने के लिए जमीन देने के संदर्भ में आग्रह कर चुके हैं। लेकिन, सरकार को शायद कोटरोपी जैसे हादसे का इंतजार है। पंचायत के प्रधान देसराज ने कहा कि पूरा गांव दहशत में जीने को मजबूर है। जमीन के धंसने से कोई भी बड़ा हादसा कभी भी पेश आ सकता है। इससे पहले भी इस गांव में प्राकृतिक आपदाएं आ चुकी हैं। गत तीन चार साल पहले भी लोगों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। यह सारा गांव धंस रहा है। गांव में करीब 30 से 32 परिवार रहते हैं। सरकार को कई बार इस समस्या से अवगत करवाया जा चुका है। पंचायत का आग्रह है कि गांव के ऊपर और नीचे सरकारी भूमि पड़ी है। पंचायत के लोग सरकार से मांग करते रहे हैं कि उनकी जमीन लेकर उन्हें यह सरकारी भूमि अलाट की दी जाए।
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