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Mandi News: आयुर्वेदिक फार्मेसी में तैयार कीं 19 हजार किलोग्राम औषधियां
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प्रदेश के 1200 आयुष केंद्रों और 50 अस्पतालों में दूर होगा दवा संकट
कोरोना काल में भी मिसाल बन चुकी है जोगिंद्रनगर फार्मेसी
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर स्थित ऐतिहासिक आयुर्वेदिक फार्मेसी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी राहत पहुंचाई है। फार्मेसी में करीब 1.22 करोड़ रुपये की लागत से 19,290 किलोग्राम (19 मीट्रिक टन से अधिक) उच्च गुणवत्ता वाली आयुर्वेदिक औषधियों का सफल उत्पादन किया गया है। इस बड़ी खेप से प्रदेश के लगभग 1,200 आयुष स्वास्थ्य केंद्रों और 50 से अधिक आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की संभावित कमी का संकट टल जाएगा।
वर्ष 1953 में स्थापित यह फार्मेसी प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों, शास्त्रीय विधियों और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां तैयार की जाने वाली औषधियां सर्दी, खांसी, पेट संबंधी समस्याओं (गैस्ट्रिक) सहित विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोगी साबित होती हैं। हादसों में घायल मरीजों के उपचार में भी इन दवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कोरोना काल के दौरान यहां तैयार औषधीय काढ़ों ने भी मरीजों के स्वास्थ्य सुधार में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद सरकार ने फार्मेसी में जीएमपी मानकों के अनुरूप आधुनिक मशीनरी स्थापित की।
हाल में हुए उत्पादन के तहत फार्मेसी में 4,560 किलोग्राम पंचगुणा तेल, 5,972.7 किलोग्राम अविपत्ति कर चूर्ण, 2,808.5 किलोग्राम वासावलेह, 5,880.95 किलोग्राम तुलस्यादि कषाय, 35.2 किलोग्राम कासावलेह, 18.3 किलोग्राम मधुयष्ट्यादि कषाय और 15.25 किलोग्राम त्रिफला टैबलेट्स का निर्माण किया गया है।
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आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर की प्रभारी डॉ. नीलम और आयुष विभाग मंडी के उपनिदेशक डॉ. राजन जसवाल ने बताया कि जीएमपी मानकों के तहत तैयार की गई ये औषधियां प्रदेशभर के हजारों मरीजों को प्राकृतिक स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध करवाने में सहायक होंगी।
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कोरोना काल में भी मिसाल बन चुकी है जोगिंद्रनगर फार्मेसी
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर स्थित ऐतिहासिक आयुर्वेदिक फार्मेसी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी राहत पहुंचाई है। फार्मेसी में करीब 1.22 करोड़ रुपये की लागत से 19,290 किलोग्राम (19 मीट्रिक टन से अधिक) उच्च गुणवत्ता वाली आयुर्वेदिक औषधियों का सफल उत्पादन किया गया है। इस बड़ी खेप से प्रदेश के लगभग 1,200 आयुष स्वास्थ्य केंद्रों और 50 से अधिक आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की संभावित कमी का संकट टल जाएगा।
वर्ष 1953 में स्थापित यह फार्मेसी प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों, शास्त्रीय विधियों और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां तैयार की जाने वाली औषधियां सर्दी, खांसी, पेट संबंधी समस्याओं (गैस्ट्रिक) सहित विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोगी साबित होती हैं। हादसों में घायल मरीजों के उपचार में भी इन दवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कोरोना काल के दौरान यहां तैयार औषधीय काढ़ों ने भी मरीजों के स्वास्थ्य सुधार में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद सरकार ने फार्मेसी में जीएमपी मानकों के अनुरूप आधुनिक मशीनरी स्थापित की।
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हाल में हुए उत्पादन के तहत फार्मेसी में 4,560 किलोग्राम पंचगुणा तेल, 5,972.7 किलोग्राम अविपत्ति कर चूर्ण, 2,808.5 किलोग्राम वासावलेह, 5,880.95 किलोग्राम तुलस्यादि कषाय, 35.2 किलोग्राम कासावलेह, 18.3 किलोग्राम मधुयष्ट्यादि कषाय और 15.25 किलोग्राम त्रिफला टैबलेट्स का निर्माण किया गया है।
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आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर की प्रभारी डॉ. नीलम और आयुष विभाग मंडी के उपनिदेशक डॉ. राजन जसवाल ने बताया कि जीएमपी मानकों के तहत तैयार की गई ये औषधियां प्रदेशभर के हजारों मरीजों को प्राकृतिक स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध करवाने में सहायक होंगी।