देवताओं की शाही जलेब में नशा मुक्ति की सीख

Shimla Bureau Updated Thu, 15 Feb 2018 11:07 PM IST
देवताओं की शाही जलेब में नशा मुक्ति की सीख
मंडी। रियासतकाल के बाद महाशिवरात्रि की शाही जलेब में पहली बार अहम बदलाव हुए हैं। मनोरंजन के साथ नशामुक्ति की सीख दी गई। दशकों बाद इस अनूठे नजारे के छोटी काशी के हजारों लोग गवाह बने। तीन दशक बाद चार गढ़ों के देवों ने देव-मानस मिलन के प्रतीक शिवरात्रि महोत्सव की शाही जलेब में देव धुनों पर झूमते हुए नशे से दूर रहने की नसीहत दी। 80 के दशक के बाद यह अनूठा नजारा देखने को मिला। चार गढ़ों यानी चौहारघाटी के बड़ोदेयो हुरंग नारायण ने रथ की पट्टिका पर बाकायदा संदेश लिख कर जलेब में शिरकत करने वाले हजारों लोगों को नशा न करने का संदेश दिया। बड़ादेयो की अगुवानी में करीब तीस वर्ष बाद चार गढ़ों के इन देवों ने शिवरात्रि महोत्सव में शिरकत की। जलेब में सिराजी और तुंगल की नाटी से मनोरंजन का भी खूब तड़का लगा। 80 के दशक में शिवरात्रि महोत्सव में बड़ोदेयो का कड़ाह चोरी होने से चार गढ़ों के इन देवताओं ने महोत्सव में शिरकत करना बंद कर दिया था। 10 वर्ष के बाद जब बड़ोदेयो ने कड़ाह के चोरों को पकड़ कर सजा दी तो 90 के दशक के अंत में इन देवों ने महोत्सव में शिरकत की। लेकिन, शाही जलेब में चलना बंद कर दिया। इस दफा सर्वदेवता सेवा समिति मंडी के प्रयासों से देवों ने करीब तीन दशक बाद महोत्सव में शिरकत की और नशामुक्ति का संदेश दिया।
बड़ोदेयो हुरंग नशा करने पर लेते थे बकरे की बलि
बड़ोदेयो हुरंग नारायण नशा करने पर सजा देते हैं। जब पशु बलि पर प्रतिबंध नहीं था तो देव के मूल स्थान में देव ने कई दफा धूम्रपान करने पर पशु बलि तक की सजा दी थी। वहीं, अब पशु बलि पर रोक के चलते देव धूम्रपान करने पर जुर्माने की सजा देते हैं। यह जुर्माना हजारों में भी हो सकता है। जुर्माने की राशि देव पर निर्भर करती है। सर्वदेवता सेवा समिति मंडी के अध्यक्ष पंडित शिवपाल ने कहा कि 80 के दशक के बाद पहली बार चार गढ़ों के देवों ने जलेब में शिरकत की। बड़ोदेयो धूम्रपान करने पर जुर्माना लगाते हैं।

चार गढ़ों में धूम्रपान पर सदियों से पाबंदी
चार गढ़ यानी चौहारघाटी। हर गढ़ में प्रमुख देवता हैं। इन गढ़ों में धूम्रपान सदियों से प्रतिबंधित है। आज भी इस परंपरा को लोग संजीदगी से निभाते हैं। चार गढ़ों में हस्तपुर, देव गढ़, कुट गढ़ और अमर गढ़ शामिल हैं। बड़ादेयो हुरंग नारायण के पुजारी ईश्वर दास ने कहा कि हस्तपुर गढ़ में बड़ादेयो हुरंग नारायण, देव पेखर का गहरी, देवगढ़ में देव पशाकोट, मता खुंगणी, कुट गढ़ में गलू का गैहरी और अमर गढ़ में देव द्रुण का गैहरी, तैरला गैहरी, घड़ौनी नारायण वास करते हैं। इन गढ़ों में आज भी धूम्रपान प्रतिबंधित है।

देवों ने दिया नशामुक्ति का संदेश : ऋग्वेद ठाकुर
उपायुक्त मंडी एवं शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि बड़ादेयो हुरंग नारायण ने दशकों बाद जलेब में शिरकत कर धूम्रपान न करने का संदेश दिया है। देव आस्था के इस महाकुंभ में दशकों बाद यह अनूठा नजारा देखने को मिला।

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