टैक्सी का स्टेयरिंग थामे रवीना के हाथ बढ़ रहे सेना में अफसर बनने की तरफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो, जोगिंद्रनगर (मंडी)। प्रदेश में सबसे कम उम्र की पहली 19 वर्षीय टैक्सी चालक रवीना ठाकुर ने साबित कर दिया है कि बेटियों को बेटों से कम आंकने की भूल न करें। रवीना के हौसले सलाम योग्य हैं। उनकी कड़ी मेहनत का हर कोई कायल है। दिल्ली, चंडीगढ़ के सपाट रास्ते हों या फिर शिमला, धर्मशाला, लाहुल-स्पीति के उदयपुर की बलखाती खतरनाक सड़कें। चेहरे पर बिना शिकन और डर से स्टेयरिंग थामे रवीना न केवल सवारियों को सही सलामत उनकी मंजिल तक पहुंचाती है, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक मदद करते हुए सेना में अफसर बनने के लक्ष्य की ओर भी अग्रसर हैं।
सेना में ऑफिसर बन कर देश सेवा का जज्बा लिए जोगिंद्रनगर की निकटवर्ती पंचायत मसौली के गांव भट्ठा की रहने वाली यह होनहार मनाली में टैक्सी चलाती हैं। वीरवार को अपने पैतृक गांव भट्ठा पहुंची युवा टैक्सी चालक ने बताया कि वह अपने माता-पिता और भाई बहन के साथ वर्ष 2012 से मनाली में रहती थी और अचानक ही लगभग 16 वर्ष की उम्र में रवीना के पिता राजसिंह का साया उनके सिर पर से उठ गया। लेकिन, मां और छोटे भाई-बहन की परवरिश तथा भाई-बहनों की पढ़ाई लिखाई और घर की माली हालत को देखते हुए पिता की ओर से उन्हें सिखाया गया वाहन चलाने का काम सहारा बन गया। 2016 में 19 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद रवीना ने ड्राइविंग की परीक्षा जोगिंद्रनगर में उत्तीर्ण कर अपना लाइट मोटर व्हीकल का ड्राइविंग लाइसेंस बनाया। इस वर्ष सितंबर में एलएमवी कैब/कार्मिशयल का लाइसेंस बनाकर मनाली में वह टैक्सी चलाने लगी। साथ साथ वह इग्नू से अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए बीए फाइनल में है। सेना में अफसर बनना चाहती है।
पहली छोटी उम्र की टैक्सी चालक : एसडीएम
एसडीएम दीप्ति मंढ़ोत्रा ने कहा कि सितंबर में रवीना का एलएमवी कैब का लाइसेंस बना है। प्रदेश में वह पहली कम उम्र की टैक्सी चालक महिला बनी है। एक बेटे की तरह वह टैक्सी चलाकर अपनी पढ़ाई का खर्च तो उठा ही रही है, जबकि परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही है।
फोरलेन ने छीना रोजगार
रवीना की मां शांता देवी मनाली में चाय-पानी का होटल चला रही थी। लेकिन, फोरलेन के निर्माण से उनका यह साधन भी उनसे छिन गया। अब वह घर पर ही रह कर अपने बच्चों की देखभाल कर रही हैं। रवीना ठाकुर का छोटा भाई हर्ष मनाली में आठवीं कक्षा में तथा छोटी बहन सेजल दस जमा दो कक्षा में पढ़ रही है। उन्हें दु:ख भी है कि बेटी है अनमोल के तहत सरकार की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पाई। फिर भी अपने परिवार और दूसरी महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम करते हुए दिखा दिया कि सही में बेटी अनमोल ही होती है और अपने परिवार के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास कर सकती है।
मां बोली पूरे होने लगे सपने
रवीना ठाकुर की माता शांता देवी ने भावुक होते हुए कहा कि पिता का साया लगभग तीन साल पहले इन बच्चों के सिर से उठ गया था। जिसके चलते आर्थिक तंगी के कारण रवीना को पिता की ओर से सिखाई गई गाड़ी काम आई। अपने दिल के टुकड़े को दूसरे की टैक्सी चलाते देख दु:ख तो होता है, पर खुशी भी है कि उनकी बेटी ने छोटी सी उम्र में अपनी समझदारी से पूरे घर को संभाल लिया है और अब जोगिंद्रनगर के भट्ठा गांव में अपना मकान बनाने का कार्य भी शुरू किया है। पापा का साथ छूटने के बाद अब परिवार वालों के लिए वह बेटा बन कर उनका सहारा है।