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छम अनुष्ठान में गुरू पदमसंभव के आठ रूपों के दर्शन
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:11 PM IST
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रिवालसर (मंडी)। रिवालसर में बौद्ध गुरु पद्मसंभव के जन्म दिवस पर मनाए जाने वाले छेश्चू पर्व त्रिवेणी धर्मस्थली में बौद्ध श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। यह पर्व फाल्गुन माह की दसवीं तिथि को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। छेश्चू पर्व में सुबह से निगमापा बौद्ध मठ में श्रद्धालुओं के उमड़ने का सिलसिला शुरू हो गया था।
निगमापा मठ के प्रांगण में आयोजित छम अनुष्ठान में गुरु पद्मसंभव के अलग-अलग आठ रूपों सहित दाईं ओर रानी मंदरवा और बाएं हिस्से में डुंगे को दर्शाया गया। जिसमें गुरु सरोज बज्र, गुरु साक्या सिंह, गुरु मतिमान वररुचि, गुरु पद्मसंभव, गुरु पद्मराज, गुरु सूर्यरसिन, गुरु सिंघनाद, गुरु बज्र लोकोत्तर के रूप में की गई सिद्धियों को विस्तारपूर्वक दिखाया गया है । गुरु के अष्ट नामों के आधार पर तिब्बत और भारतीय हिमालय क्षेत्र सिक्कम, लद्दाख हिमाचल के रिवालसर में अष्ट नाम गुरु छनगयद कयी छम का तांत्रिक अनुष्ठान प्रस्तुत किया जाता है, जोकि प्रसिद्ध ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव है। इस तांत्रिक अनुष्ठान यानी छम के दर्शन को सौभाग्यशाली माना जाता है। इसके बाद गुरु पद्मसंभव की प्रतिमा और उनके धार्मिक ग्रंथों की शोभायात्रा रिवालसर झील परिसर में निकाली गई। जिसमें सैकड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्य रोशन लाल नेगी ने बताया कि मंडी के उस समय के राजा जौहर क्याल्पो ने गुरु से अपनी गलती स्वीकारते हुए उन्हें भेंट स्वरूप ताज मुकुट भेंट किया था। आचार्य ने भोटी भाषा का हिंदी में अनुवाद कर गुरु पद्मसंभव की जीवनी पर प्रकाश डाला। तीन दिवसीय राज्य स्तरीय छेश्चू मेले में 26 फरवरी को निगमापा मठ में झंडा रस्म अदा की जाएगी।
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निगमापा मठ के प्रांगण में आयोजित छम अनुष्ठान में गुरु पद्मसंभव के अलग-अलग आठ रूपों सहित दाईं ओर रानी मंदरवा और बाएं हिस्से में डुंगे को दर्शाया गया। जिसमें गुरु सरोज बज्र, गुरु साक्या सिंह, गुरु मतिमान वररुचि, गुरु पद्मसंभव, गुरु पद्मराज, गुरु सूर्यरसिन, गुरु सिंघनाद, गुरु बज्र लोकोत्तर के रूप में की गई सिद्धियों को विस्तारपूर्वक दिखाया गया है । गुरु के अष्ट नामों के आधार पर तिब्बत और भारतीय हिमालय क्षेत्र सिक्कम, लद्दाख हिमाचल के रिवालसर में अष्ट नाम गुरु छनगयद कयी छम का तांत्रिक अनुष्ठान प्रस्तुत किया जाता है, जोकि प्रसिद्ध ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव है। इस तांत्रिक अनुष्ठान यानी छम के दर्शन को सौभाग्यशाली माना जाता है। इसके बाद गुरु पद्मसंभव की प्रतिमा और उनके धार्मिक ग्रंथों की शोभायात्रा रिवालसर झील परिसर में निकाली गई। जिसमें सैकड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्य रोशन लाल नेगी ने बताया कि मंडी के उस समय के राजा जौहर क्याल्पो ने गुरु से अपनी गलती स्वीकारते हुए उन्हें भेंट स्वरूप ताज मुकुट भेंट किया था। आचार्य ने भोटी भाषा का हिंदी में अनुवाद कर गुरु पद्मसंभव की जीवनी पर प्रकाश डाला। तीन दिवसीय राज्य स्तरीय छेश्चू मेले में 26 फरवरी को निगमापा मठ में झंडा रस्म अदा की जाएगी।
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