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नन्हें बच्चों को गेट के बाहर आधा घंटा खड़ा कर किया गया प्रताड़ित
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:30 PM IST
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सुंदरनगर (मंडी)। बच्चे देरी से स्कूल क्या पहुंचे, प्रबंधन ने उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया। स्कूल गेट बंदकर उन्हें बाहर खड़ा रखा गया। इस मामले में सोशल मीडिया पर भी स्कूल प्रबंधन की खूब आलोचना हो रही है। मामला सुंदरनगर के एक निजी स्कूल का है।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह बच्चों को स्कूल ले जाने वाला वाहन ट्रैफिक में फंसने के कारण थोड़ा सा लेट हो गया। स्कूल का समय शुरू होते ही प्रबंधन ने गेट बंद करवा दिया। देरी से पहुंचने का खामियाजा बच्चों को गेट के बाहर खड़ा होकर भुगतना पड़ा। हालांकि स्थानीय लोगों ने बच्चों को गेट के बाहर खड़े देख स्कूल के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी को गेट खोलकर बच्चों को अंदर खड़ा करने के लिए कहा। लेकिन उसने लोगों को बात को अनसुना कर दिया और बच्चों को ट्रैफिक के बीच आधा घंटे तक सड़क पर खड़े रहने को मजबूर होना पड़ा।
कुछ लोगों ने स्कूल में फोन कर प्रबंधन को खूब खरी खोटी सुनाई, तब जाकर आधे घंटे बाद गेट खोलकर बच्चों को अंदर जाने दिया गया। स्कूल प्रबंधन की इस हरकत को स्थानीय लोगों ने फेसबुक पर अपलोड कर दिया, जिसके उपरांत सोशल मीडिया पर लोगों का खूब गुस्सा फूटा। हालांकि बच्चों को गेट के बाहर खड़ा करने के दौरान कोई हादसा हो जाता तो इसके लिए कौन जिम्मेवार होता, इसको लेकर सभी सवाल कर रहे है। वहीं इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का पक्ष लेने के लिए कई बार संपर्क साधा गया। लेकिन प्रबंधन ने इस बारे में कोई भी बात करने से इंकार कर दिया। वहीं लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रशासन से कड़ी कार्रवाई अमल में लाने की मांग उठाई है। इधर, एसडीएम देबा श्वेता बानिक ने मामले की जांच करवाने की बात कही है।
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जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह बच्चों को स्कूल ले जाने वाला वाहन ट्रैफिक में फंसने के कारण थोड़ा सा लेट हो गया। स्कूल का समय शुरू होते ही प्रबंधन ने गेट बंद करवा दिया। देरी से पहुंचने का खामियाजा बच्चों को गेट के बाहर खड़ा होकर भुगतना पड़ा। हालांकि स्थानीय लोगों ने बच्चों को गेट के बाहर खड़े देख स्कूल के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी को गेट खोलकर बच्चों को अंदर खड़ा करने के लिए कहा। लेकिन उसने लोगों को बात को अनसुना कर दिया और बच्चों को ट्रैफिक के बीच आधा घंटे तक सड़क पर खड़े रहने को मजबूर होना पड़ा।
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कुछ लोगों ने स्कूल में फोन कर प्रबंधन को खूब खरी खोटी सुनाई, तब जाकर आधे घंटे बाद गेट खोलकर बच्चों को अंदर जाने दिया गया। स्कूल प्रबंधन की इस हरकत को स्थानीय लोगों ने फेसबुक पर अपलोड कर दिया, जिसके उपरांत सोशल मीडिया पर लोगों का खूब गुस्सा फूटा। हालांकि बच्चों को गेट के बाहर खड़ा करने के दौरान कोई हादसा हो जाता तो इसके लिए कौन जिम्मेवार होता, इसको लेकर सभी सवाल कर रहे है। वहीं इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का पक्ष लेने के लिए कई बार संपर्क साधा गया। लेकिन प्रबंधन ने इस बारे में कोई भी बात करने से इंकार कर दिया। वहीं लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रशासन से कड़ी कार्रवाई अमल में लाने की मांग उठाई है। इधर, एसडीएम देबा श्वेता बानिक ने मामले की जांच करवाने की बात कही है।
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