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Mandi News: मिल्क प्लांट की मनमानी से किसानों का 15 क्विंटल दूध बर्बाद

Fri, 08 May 2026 12:40 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 12:40 AM IST
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15 quintals of milk of farmers wasted due to the arbitrariness of the milk plant.
किसानों ने एकत्रित होकर विभाग के खिलाफ व्यक्त किया किया विरोध
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संवाद न्यूज एजेंसी

कोटली (मंडी)। कोटली की ग्राम पंचायत डंढाल के किसानों में सरकार और दुग्ध विभाग की नीतियों के खिलाफ रोष है। डंढाल गांव के किसानों ने वीरवार को एकत्रित होकर विभाग के खिलाफ विरोध व्यक्त किया। किसानों का आरोप है कि मिल्क प्लांट बार-बार दिए जा रहे ब्रेक के कारण उनका हजारों लीटर दूध बर्बाद हो रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि वे रोजाना क्षेत्र से करीब 5 क्विंटल दूध मिल्क प्लांट भेजते हैं। लेकिन विभाग की ओर से अचानक तीन-तीन दिन का ब्रेक लगा दिया जाता है। इस अवधि में इकट्ठा होने वाला 15 क्विंटल दूध को किसान कहां खपाएं, यह एक बड़ा सवाल है।
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स्थानीय निवासी दिलीप सिंह ने कहा कि विभाग कहता है कि दूध फेंको मत, वरना भविष्य में दूध लेना बंद कर देंगे। दूसरी ओर सरकार गैस मुहैया नहीं करवा रही जिससे पनीर बना सकें। किसान लाभ सिंह और कृष्णा देवी ने बताया कि किसानों की परेशानी केवल दूध की बर्बादी तक सीमित नहीं है। विभाग की कार्यप्रणाली बेहद सुस्त है। किसानों को तीन-तीन महीने तक दूध का भुगतान नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की है कि दूध चाहे निर्धारित सरकारी रेट पर ही लिया जाए, लेकिन उसका भुगतान समय पर होना चाहिए ताकि किसान अपना गुजारा कर सकें।
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ग्रामीण निशा देवी ने बताया कि उनके पास 5 गायें हैं और वे रोजाना 40 लीटर दूध देती हैं। हर 10 दिन में लगने वाले ब्रेक से एक क्विंटल से ज्यादा दूध खराब हो जाता है। वहीं, खूब राम ने सुझाव दिया कि सरकार को क्षेत्र में लघु उद्योग स्थापित करने चाहिए ताकि बेरोजगार युवाओं को काम मिले और अतिरिक्त दूध का सदुपयोग पनीर या अन्य उत्पादों के रूप में हो सके।

चिलिंग सेंटर साईगलू के प्रभारी वेद राम ने बताया कि चक्कर मिल्क प्लांट में वर्तमान में अपग्रेडेशन (नवीनीकरण) का कार्य चल रहा है। इसी तकनीकी कारण से सप्लाई में दिक्कत आ रही है और किसानों को अस्थायी रूप से ब्रेक दिया जा रहा है।
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