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शहर में बसंत पंचमी पर बच्चों ने खूब उड़ाईं पतंगें
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी/बलद्वाड़ा। बसंत पंचमी के त्योहार पर शहर के अलावा जिले के कुछ चुनिंदा स्थानों पर दिनभर बच्चों ने पतंगें उड़ाने का पूरा मजा लिया। मंडी शहर में यह क्रेज बहुत अधिक देखने को मिला। इसके अलावा बलद्वाड़ा, बल्ह, सुंदरनगर और सरकाघाट में भी बच्चों ने पतंगें उड़ाने का पूरा मजा लिया। मंडी शहर में सुबह से ही बच्चे पतंगें उड़ाने के लिए घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर दिखाई दिए। आकाश में इस दौरान पतंगें परिंदों की तरह उड़ती हुई दिखाई दीं। हालांकि, रविवार के दिन बाजार बंद होते हैं, लेकिन पतंगें बेचने वालों की दुकानें खुली रहीं। बाजार में पतंग की दुकानों में पतंगें खरीदने की होड़ लगी रही। इस मौके पर कई संस्थाओं की ओर से बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। दिनभर बच्चे पड्डल मैदान, पंचवक्त्र मंदिर और टारना में पतंग उड़ाते हुए देखे गए। उधर, बसंत पंचमी पर लोगों ने अपने-अपने घरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना भी की। इस दिन को ज्ञान, कला बुद्धि और संगीत की देवी मां सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया गया है। ऋतुओं का राजा कहे जाने वाला बसंत पंचमी के दिन से हल्का-हल्का गर्मी का अहसास होना शुरू हो जाता है और इस दिन से पीले-पीले सरसों के फूल खिलना भी शुरू हो जाते हैं।
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मंडी/बलद्वाड़ा। बसंत पंचमी के त्योहार पर शहर के अलावा जिले के कुछ चुनिंदा स्थानों पर दिनभर बच्चों ने पतंगें उड़ाने का पूरा मजा लिया। मंडी शहर में यह क्रेज बहुत अधिक देखने को मिला। इसके अलावा बलद्वाड़ा, बल्ह, सुंदरनगर और सरकाघाट में भी बच्चों ने पतंगें उड़ाने का पूरा मजा लिया। मंडी शहर में सुबह से ही बच्चे पतंगें उड़ाने के लिए घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर दिखाई दिए। आकाश में इस दौरान पतंगें परिंदों की तरह उड़ती हुई दिखाई दीं। हालांकि, रविवार के दिन बाजार बंद होते हैं, लेकिन पतंगें बेचने वालों की दुकानें खुली रहीं। बाजार में पतंग की दुकानों में पतंगें खरीदने की होड़ लगी रही। इस मौके पर कई संस्थाओं की ओर से बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। दिनभर बच्चे पड्डल मैदान, पंचवक्त्र मंदिर और टारना में पतंग उड़ाते हुए देखे गए। उधर, बसंत पंचमी पर लोगों ने अपने-अपने घरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना भी की। इस दिन को ज्ञान, कला बुद्धि और संगीत की देवी मां सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया गया है। ऋतुओं का राजा कहे जाने वाला बसंत पंचमी के दिन से हल्का-हल्का गर्मी का अहसास होना शुरू हो जाता है और इस दिन से पीले-पीले सरसों के फूल खिलना भी शुरू हो जाते हैं।