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राजस्व मंत्री के गृह जिला में ही लंबित राजस्व मामलों की गलत जानकारी
Updated Wed, 28 Jun 2017 10:43 PM IST
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मंडी। राजस्व मंत्री के जिला मंडी में प्रशासन की नाक तले लंबित राजस्व मामलों की जानकारी ही सरकारी वेबसाइट पर गलत दी जा रही है। परफोरमेंस को बढ़ाने के चक्कर में कुछ अफसर इन गलत जानकारियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। तहसील बल्ह, तहसील चच्योट (गोहर) और बीएसएल परियोजना के विस्थापितों के सरकारी वेबसाइट पर गलत आंकड़े दर्शाने या दरकिनार करने में किसी तरह का परहेज नहीं किया जा रहा है।
बल्ह तहसील को अभी वेबसाइट में ही स्थान नहीं दिया गया है। जबकि, वहां 4000 से अधिक ऐसे राजस्व मामले लंबित हैं, जो पांच साल से 15 साल तक पुराने है। बल्ह तहसील सदर मंडी तहसील से तोड़कर बनाई गई थी और यदि इन मामलों को मंडी सदर का माना जाए तो उसकी संख्या केवल 707 दर्शाई गई है। जाहिर है कि चार हजार से ज्यादा राजस्व मामले रिकॉर्ड से बाहर रखे गए हैं जोकि सूचना के अधिकार अधिनियम के विरुद्ध है। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि राजस्व मंत्री के जिला में ही यह हाल है तो अन्य जिलों में क्या होगा। इसके अलावा तहसील चच्योट में सैकड़ों ऐसे मामले लंबित पडे़ हैं, जिनमें नौ तोड़ 20-30 साल पहले मंजूर हो चुकी है लेकिन, इंतकाल अभी तक तस्दीक नहीं हुए हैं। यही हाल बीएसएएसएल परियोजना के विस्थापितों का है। यहां 43 साल पहले आवंटित भूमि की मंजूरी के आदेश के लिए लोग आज भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। डीसी संदीप कदम का कहना है कि यदि ऐसा है तो उसे दुरुस्त करने के संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएंगे।
वेबसाइट में जानकारी पर उठाए सवाल
सेवानिवृत्त एसडीएम बेली राम कौंडल ने भी वेबसाइट पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राजस्व विभाग वेबसाइट में राजस्व विभाग के लंबित मामलों का सही आंकड़ा होना चाहिए। गलत आंकड़े लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाले हो सकते हैं। दावा किया है कि लंबित राजस्व विभाग के मामलों की जानकारी सरकार वेबसाइट पर गलत दे जा रही है।
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बल्ह तहसील को अभी वेबसाइट में ही स्थान नहीं दिया गया है। जबकि, वहां 4000 से अधिक ऐसे राजस्व मामले लंबित हैं, जो पांच साल से 15 साल तक पुराने है। बल्ह तहसील सदर मंडी तहसील से तोड़कर बनाई गई थी और यदि इन मामलों को मंडी सदर का माना जाए तो उसकी संख्या केवल 707 दर्शाई गई है। जाहिर है कि चार हजार से ज्यादा राजस्व मामले रिकॉर्ड से बाहर रखे गए हैं जोकि सूचना के अधिकार अधिनियम के विरुद्ध है। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि राजस्व मंत्री के जिला में ही यह हाल है तो अन्य जिलों में क्या होगा। इसके अलावा तहसील चच्योट में सैकड़ों ऐसे मामले लंबित पडे़ हैं, जिनमें नौ तोड़ 20-30 साल पहले मंजूर हो चुकी है लेकिन, इंतकाल अभी तक तस्दीक नहीं हुए हैं। यही हाल बीएसएएसएल परियोजना के विस्थापितों का है। यहां 43 साल पहले आवंटित भूमि की मंजूरी के आदेश के लिए लोग आज भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। डीसी संदीप कदम का कहना है कि यदि ऐसा है तो उसे दुरुस्त करने के संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएंगे।
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वेबसाइट में जानकारी पर उठाए सवाल
सेवानिवृत्त एसडीएम बेली राम कौंडल ने भी वेबसाइट पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राजस्व विभाग वेबसाइट में राजस्व विभाग के लंबित मामलों का सही आंकड़ा होना चाहिए। गलत आंकड़े लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाले हो सकते हैं। दावा किया है कि लंबित राजस्व विभाग के मामलों की जानकारी सरकार वेबसाइट पर गलत दे जा रही है।
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