{"_id":"e29b3b8f4c52af863a5006bf63beda6b","slug":"wooden-house-are-in-dangoure-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लकड़ी के मकान हर समय खतरे की जद में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लकड़ी के मकान हर समय खतरे की जद में
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
Updated Sun, 22 Nov 2015 06:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुल्लू/बंजार। जिले के काष्ठकुणी शैली के बने मकानों के वजूद पर हर समय खतरा मंडरा रहा है। पिछले दस सालों में जिले में आग से अरबों की संपत्ति राख हो चुकी है। सैंज का कोटला गांव धू-धू कर जलता रहा और सड़क न होने से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच सकीं।
विज्ञापन
फायर कर्मी मौके पर जाकर आग के तांडव को देखते रहे और कुछ ही घंटों में पूरा गांव आग के ढेर में बदल गया। ऐसे में अब काष्ठकुणी शैली वाले इन घरों को आग से बचाना चिंता का विषय बन गया है। वहीं, दूसरी ओर सड़कों का न होना भी आग की घटनाओं को न रोक पाने का कारण माना जा रहा है। गांव में आग को बुझाने के लिए पानी के भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं है।
विज्ञापन
अधिकतर गांवों में पानी के स्टोर टैंक नहीं हैं, जो इस प्रकार की स्थिति से निपटने के काम आ सकें। घाटी के समाजसेवी दौलत भारती, दिनेश कुमार, प्यारे लाल और नीमत राम ने कहा कि हर गांव में पानी का बड़े स्टोर का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि आग लगने की स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जा सके। आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री कर्ण सिंह का कहना है कि आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए गांव स्तर पर प्रबंध किए जाएंगे।
विज्ञापन