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अनछुए पर्यटन स्थलों को अपने स्तर पर लगा रहे पंख
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सैंज में लाईडा गांव में रीतम ठाकुर के होमस्टे में पारंपरिक खाने का आनंद उठाते सैलानी। संवाद।
- फोटो : Kullu
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संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी में एक युवा ने स्थानीय लोगों में पर्यटन व्यवसाय को लेकर उम्मीद की किरण जगाई है। रीतम ठाकुर सैंज में ही 2012 से अपने क्षेत्र के अनछुए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दे रहे हैं। पर्यटकों को ट्रैकिंग, रॉक क्लाइबिंग, रिवर क्रॉसिंग, बाइक राइडिंग जैसी साहसिक गतिविधियां करवाकर गांव के बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार दे रहे हैं। इसी जुनून ने लाईडा गांव के रीतम को सफल पर्यटन व्यवसायी बना दिया।
उनकी इस पहल से गांव के 25 युवाओं को रोजगार मिला है। वह ग्रामीण पर्यटन को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। बंजार उपमंडल मुख्यालय से 20 किमी दूर चनौन पंचायत स्थित लाईडा गांव के युवा ने पर्यटन गतिविधियों से अछूते इस गांव और इलाके तक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आसपास के मनोरम स्थानों को चिह्नित किया। गांव में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों की सूची बनाई और पहाड़ी रहन सहन को पर्यटन से जोड़ने का गहनता से अध्ययन किया।
रीतम ने अपने घर को होम स्टे का रूप देकर कारोबार की शुरुआत की और आसपास के अनछुए स्थनों को एक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) कुफरी से डिग्री प्राप्त करने के बाद रीतम ने आठ साल शिमला और मनाली के होटलों में बतौर महाप्रबंधक नौकरी की। अपने गांव के पर्यटन को विकसित करने के उद्देश्य से वह नौकरी छोड़कर आए और स्थानीय लोगों को पर्यटन व्यवसाय को लेकर जागरूक किया। रीतम ने ग्रामीणों को बताया कि कोशिश करने से कामयाबी हासिल की जा सकती है। लाईडा के आसपास की पहाड़ियों में पर्यटकों को ट्रैकिंग, रॉक क्लाइबिंग, रिवर क्रॉसिंग, बाइक राइडिंग जैसी साहसिक गतिविधियां करवाकर पर्यटकों को आकर्षित किया।
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अनछुए पर्यटन स्थलों तक पहुंचाए पर्यटक
रीतम लाईडा के आसपास के देवस्थलों और प्रकृतिक स्थलों के हजारों देसी और विदेशी पर्यटकों के दीदार करवा चुके हैं। बुंगा और थिहणी तक ट्रैकिंग रूट बनाया। गलून के लक्ष्मी नारायण और लाईडा के पंचवीर मंदिर को पर्यटन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
त्रिवेंद्रम की पर्यटन अर्चना बाबू ने लाईडा गांव के ग्रामीण पर्यटन को लेकर रिव्यू लिखा है कि यह अब तक की सबसे अच्छी मेजबानी है। लिखा है कि मैं और मेरे पति यहां 10 दिन तक रहे और यह हमारी 50 दिन की लंबी हिमाचल यात्रा के सबसे अच्छे दिन थे। पारंपरिक कुल्लवी भोजन बहुत स्वादिष्ट है। लाईडा गांव उन लोगों के लिए अत्यधिक मनोरम हैं, जो ऑफ बीट और शांतिपूर्ण स्थानों पर जाना पसंद करते हैं।
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सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी में एक युवा ने स्थानीय लोगों में पर्यटन व्यवसाय को लेकर उम्मीद की किरण जगाई है। रीतम ठाकुर सैंज में ही 2012 से अपने क्षेत्र के अनछुए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दे रहे हैं। पर्यटकों को ट्रैकिंग, रॉक क्लाइबिंग, रिवर क्रॉसिंग, बाइक राइडिंग जैसी साहसिक गतिविधियां करवाकर गांव के बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार दे रहे हैं। इसी जुनून ने लाईडा गांव के रीतम को सफल पर्यटन व्यवसायी बना दिया।
उनकी इस पहल से गांव के 25 युवाओं को रोजगार मिला है। वह ग्रामीण पर्यटन को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। बंजार उपमंडल मुख्यालय से 20 किमी दूर चनौन पंचायत स्थित लाईडा गांव के युवा ने पर्यटन गतिविधियों से अछूते इस गांव और इलाके तक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आसपास के मनोरम स्थानों को चिह्नित किया। गांव में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों की सूची बनाई और पहाड़ी रहन सहन को पर्यटन से जोड़ने का गहनता से अध्ययन किया।
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रीतम ने अपने घर को होम स्टे का रूप देकर कारोबार की शुरुआत की और आसपास के अनछुए स्थनों को एक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) कुफरी से डिग्री प्राप्त करने के बाद रीतम ने आठ साल शिमला और मनाली के होटलों में बतौर महाप्रबंधक नौकरी की। अपने गांव के पर्यटन को विकसित करने के उद्देश्य से वह नौकरी छोड़कर आए और स्थानीय लोगों को पर्यटन व्यवसाय को लेकर जागरूक किया। रीतम ने ग्रामीणों को बताया कि कोशिश करने से कामयाबी हासिल की जा सकती है। लाईडा के आसपास की पहाड़ियों में पर्यटकों को ट्रैकिंग, रॉक क्लाइबिंग, रिवर क्रॉसिंग, बाइक राइडिंग जैसी साहसिक गतिविधियां करवाकर पर्यटकों को आकर्षित किया।
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अनछुए पर्यटन स्थलों तक पहुंचाए पर्यटक
रीतम लाईडा के आसपास के देवस्थलों और प्रकृतिक स्थलों के हजारों देसी और विदेशी पर्यटकों के दीदार करवा चुके हैं। बुंगा और थिहणी तक ट्रैकिंग रूट बनाया। गलून के लक्ष्मी नारायण और लाईडा के पंचवीर मंदिर को पर्यटन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
त्रिवेंद्रम की पर्यटन अर्चना बाबू ने लाईडा गांव के ग्रामीण पर्यटन को लेकर रिव्यू लिखा है कि यह अब तक की सबसे अच्छी मेजबानी है। लिखा है कि मैं और मेरे पति यहां 10 दिन तक रहे और यह हमारी 50 दिन की लंबी हिमाचल यात्रा के सबसे अच्छे दिन थे। पारंपरिक कुल्लवी भोजन बहुत स्वादिष्ट है। लाईडा गांव उन लोगों के लिए अत्यधिक मनोरम हैं, जो ऑफ बीट और शांतिपूर्ण स्थानों पर जाना पसंद करते हैं।